दल बदल अनवरत जारी, निजी स्वार्थ राजनीति पर क्यों भारी

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राजनीति भी क्या है मित्रों! वास्तव में ये भी एक प्रोफेशन है! जहां एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर जहर उगला जाता है, उस जहर का असर इस कदर होता है कि आम आदमी एक-दूसरे के खून के प्यासा हो जाता हैं, एक दल-दूसरे दल या फिर नेता के समर्थक खुले तौर पर एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं यहां तक कि हत्याएं हो जाती हैं। लेकिन वही नेता जिनके लिए आम आदमी व समर्थक, किसी भी हद तक चले जाते हैं…

उन नेताओं का यह हाल है कि वह अपने लाभ के लिए, जान देने वाले समर्थक से बिना पूछे ही दल बदल लेता है!! यह आज आम आदमी के लिये अत्यंत सोचनीय विषय है। आज इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि आज नीति गायब हो गई है, रह गई है तो सिर्फ और सिर्फ… राजनीति… जो उसूलों पर भारी पड़ गई है, नीतियों को खा गई है। मेरी अपील विशेषकर उन युवाओं से है जो बेचारे जोश में होश खो देते हैं इन नेताओं के लिये। इस विषय पर युवा वर्ग को सोचना होगा।

मैं भारत के प्रत्येक युवा से कहना चाहता हूं कि वह अपने विवेक से काम ले, राजनीति में खुद को स्थापित करने के लिए बड़े चेहरों के पीछे न भागे। जनता व जमीन से जुड़ा समाजसेवी या फिर नेता अपनी पहचान बिना किसी पार्टी संगठन के अपने दम पर समाज में सक्रिय रहकर खुद बड़े चेहरे बन सकते हैं, क्यों आप किसी खानदानी, घिसेपिटे चेहरे के पीछे अपना राजनीतिक कैरियर खराब करते हो।

मैं युवाओं के साथ-साथ आम आदमी को यह अपील करना चाहता हूं कि समाजसेवा ही राजनीति की पहली सीढ़ी है और राजनीति में खुद को स्थापित करने के लिए उस सीढ़ी का भरपूर इस्तेमाल करें। एक बात जरूर समझ लें समाजसेवी बनने के लिए करोड़पति होना जरूरी नहीं।

दूसरा महत्वूर्ण बिंदु यह है कि राजनीति की समझ/स्टडी बहुत जरूरी है, यदि किसी युवा में या सामाजिक/राजनीतिक कार्यकर्ता में यह समझ कायम हो गई तो वह कभी भी राजनीतिक दलों/नेताओं का पिछलग्गू नहीं बनेगा।

बड़े शर्म की बात है बहुत से लोग कितनी पार्टियों के चक्कर लगाने के बाद भी जनप्रतिनिधि नहीं चुने जाते। क्योंकि वह समाज के कार्यों में सक्रिय कम और पार्टी नेताओं के चक्कर ज्यादा/मतलब
नेताओं का पिछलग्गू ज्यादा बने रहते हैं।

जिस दिन समाज का युवा जाग जाएगा, उस दिन भारत की राजनीति स्वच्छ हो जाएगी। भाईचारा बना रहेगा और दंगे-फसाद खत्म हो जायेंगे।
# जागो भारत
# जागो युवाओं

                                                                          (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विशेषज्ञ हैं)

 

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