Faridabad/AtulyaLoktantra : हरियाणा प्रदेश यूँ तो प्रारम्भ से ही राजनीतिक उठापटक के लिए जाना जाता है चाहे इस प्रदेश में हम भजनलाल, देवीलाल, बंसीलाल की राजनीति के इतिहास को देखें । चौ गयालाल जी के दलबदल को देखें ,ओमप्रकाश चौटाला की राजनीति को देखें ,गोपाल कांडा का सरकार बनाने में अहम रोल वाले प्रकरण को देखें ,कुलदीप विश्नोई -भाजपा प्रकरण को देखें । कितने ही रोचक घटनाओं के इतिहास को समेटे हुए है हरियाणा की राजनीति।

आज हम हरियाणा कोंग्रेस की बात करें तो यह स्थिति एकाएक नहीं बनी राष्ट्रीय नेतृत्व यहां की गुटबाजी से अंजान नहीं था। हाईकमान के निक्कम्मेप्पन के कारण आज यह दुर्दशा हुई है इस पार्टी की ,एक से एक बढ़िया नेता हैं पार्टी में लेकिन,उनका नेतृत्व स्वीकार नहीं .. (गुलामी की लत कैसे छूटे ) ..

एक राष्ट्रीय पार्टी की यह स्थिति अति दुर्भाग्यपूर्ण व दुःखद है ,जब खुद की यह स्थिति है तो देश के मुद्दों पर क्या आवाज उठा पाएंगे ये लोग। मैं 90 से 2003 तक खुद इस पार्टी से जुड़ा रहा ,लेकिन तब व अब में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है इस दल में । यदि हम इस पार्टी के राष्ट्रीय कारकों पर चर्चा न भी करें ,सिर्फ हरियाणा के मामले पर को ही लें तो संगठन स्तर पर यहां पिछले कई वर्षों से लापरवाही दिखती है पार्टी नेतृत्व की ओर से ,आज प्रदेश के किसी जिले में भी जिलाध्यक्ष तक नहीं पार्टी का ,ऐसे में बूथ पर कार्यकर्ता होना दूर की कौड़ी है।

यहां नेताओं की भरमार है ,कार्यकर्ताओ की भारी किल्लत ,यह सोचनीय विषय है ,यदि केंद्रीय नेतृत्व ठीक समय पर फैसला लेता तो आज भूपेंद्र हुड्डा जैसा पुराना नेता यूँ रैली नहीं करता। ठीक विधानसभा चुनावों से पहले यह स्थिति पार्टी के लिए हितकर नहीं लगती।

खैर ..यह कॉंग्रेस को सोचना है कि वह अपना भविष्य किस ओर ले जाती है । यदि पार्टी खुद में सुधार लाती है तो आज भी समय है ,लोगों के विश्वास जितने का इनके पास ।

पत्रकार दीपक शर्मा “शक्ति”की कलम से

अपनी सलाह दे (देश की आवाज)

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