प्रदेश के 15 लाख बी एड डिग्रीधारियों की बेरोजगारी का कारण

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प्रदेश के 15 लाख बी एड डिग्रीधारियों की बेरोजगारी का कारण
प्रदेश के 15 लाख बी एड डिग्रीधारियों की बेरोजगारी का कारण

अलीगढ़( अतुल्य लोकतंत्र ): प्रदेश के पन्द्रह लाख बी एड डिग्री धारियों की बेरोजगारी के संदर्भ में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ , उच्च शिक्षा मंत्री व प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश को लिखे पत्र में प्रख्यात शिक्षाविद, धर्म समाज कालेज के पूर्व विभागाध्यक्ष व बी आर अम्बेडकर विश्व विद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष डा. रक्षपाल सिंह ने कहा है कि बी एड प्रवेशों हेतु बनीं प्रवेश नियमावली की वज़ह से वर्तमान में 15लाख से अधिक बी एड डिग्रीधारी बेरोजगार होने के कारण अपने घरों पर बैठने को मजबूर हैं और प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख डिग्रीधारीयों का इस संख्या में इज़ाफा हो रहा है।

रोजगारपरक इस महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम के डिग्रीधारीयों की प्रति वर्ष इस तरह हो रही बढ़ोतरी के लिये पूरी तरह से बी एड प्रवेश नियमावली ही जिम्मेदार है । इसकी वज़ह से प्रवेश परीक्षाओं में शून्य एवं शून्य के आसपास अंक अर्जित करने वाले नितांत अयोग्य परीक्षार्थी भी बी एड पाठ्यक्रम में प्रवेश पाकर येन केन प्रकारेण अपनी डिग्री हासिल करते रहे हैं।

डा.सिंह ने आगे कहा है कि बी एड पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांक की कोई शर्त न होने तथा प्रदेश में अनाप शनाप बी एड कालेजों को मान्यता दिये जाने के कारण योग्य परीक्षार्थियों के साथ सभी अयोग्य आवेदनकर्ताओं को बी एड पाठयक्रमों में प्रवेश मिलते रहने से प्रवेश परीक्षाएं बेमानी ही रहीं हैं। यदि बीएड प्रवेश के लिये न्यूनतम प्राप्तांक 33% ही रखे गए होते तो भी 15 लाख बी एड बेरोजगारों की संख्या 4-6 लाख तक ही सीमित रही होती।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ शिक्षक पात्रताच परीक्षा(टेट) में सफल होने के लिये एससी,ओबीसी एवं सामान्य वर्गों के लिये क्रमशः 50%,55%,60% तथा सुपर टेट में सफलता हेतु क्रमशः 55%,60%,65% अंक प्राप्ति की महत्वपूर्ण शर्तें रखी गईं , वहीँ दूसरी ओर कितना हास्यास्पद है कि बी एड प्रवेश नियमावली में प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांकों की कोई भी शर्त न होने की वज़ह से शून्य अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी भी प्रवेश पाते रहे हैं तथा येन केन प्रकारेण बी एड डिग्री भी प्राप्त करते रहे हैं।

परिणामत: ऐसी बी एड डिग्रीयों की वैधता पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह लग चुके हैं। विगत समय में संपन्न टेट व सुपर टेट के परीक्षा परिणाम क्रमशः 10%से 25% एवं 40% रहना स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि बी एड प्रवेश नियमावली में यदि प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम अंक प्राप्ति की अनिवार्यता रही होती तो नितांत अयोग्य अभ्यर्थी बी एड पाठयक्रम में प्रवेश न लेते और न दो वर्षीय पाठ्यक्रम पर प्रति विद्यार्थी 2 लाख से ऊपर की उनकी धनराशि भी बर्बाद नहीं होती ।

डा.सिंह ने पत्र में आगे लिखा है कि महोदय बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा-2021 हेतु आनलाइन आवेदन का शेड्यूल ज़ारी हो चुका है और संज्ञान में आया है कि बीएड प्रवेश नियमावली में इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षा में पूर्व वर्षों की भांति न्यूनतम अंक प्राप्ति की कोई शर्त नहीं रखी गई है अर्थात इस वर्ष भी शून्य अथवा शून्य के आसपास अंक अर्जित करने वाले अभ्यर्थियों के बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश होंगे।

ऐसी स्थिति में अयोग्य ,विवेकहीन, अपनी अयोग्यता से सर्वथा अनभिज्ञ बीएड डिग्री प्राप्त अध्यापक बनने की प्रत्याशा में अपने 2 वर्षीय प्रशिक्षण के समय एवं प्रति प्रवेशार्थी 2 लाख से ऊपर की धनराशि की बर्बादी के साथ ही बीएड बेरोजगारों की संख्या में लगभग 2 लाख का इज़ाफा ही करेंगे ।

बीएड डिग्रीधारीयों की उक्त हकीकत , टेट व सुपर टेट की सफलता की शर्तों तथा बीएड प्रवेश नियमावली को दृष्टिगत रखते हुए आवश्यकता इस बात की है कि बीएड प्रवेश नियमावली में प्रवेशार्थियों के लिये न्यूनतम अंक प्राप्ति की अनिवार्यता का समावेश किया जाये जिससे नितांत अयोग्य,विवेकहीन एवं बीएड डिग्री प्राप्ति को ही शिक्षक बनने का सपना सँजोने वाले अभ्यर्थियों को बेवजह बीएड प्रशिक्षण पर प्रति अभ्यर्थी 2 साल के समय और 2 लाख रु से अधिक धनराशि की बर्बादी से निजात मिल सके और वे अपने समय का सदुपयोग अन्य व्यवसायों में कर सकें। अत: आपसे अनुरोध है कि आप उक्त विषयक तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा-2021 की बीएड प्रवेश नियमावली में प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम अंक प्राप्ति की शर्त यथा 33%या 40%या 45%की अनिवार्यता का समावेश करने की कृपा करें जिससे 75% से अधिक अयोग्य,विवेकहीन और अपनी योग्यता से अनभिज्ञ अभ्यर्थियों को बेवजह 2 साल के अमूल्य समय तथा अरबों रु की बबादी से निजात मिल सके ।