भारतीय राजनीति के औरंगजेब हैं अखिलेश – डॉ लालजी निर्मल

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• एक भी दलित को नहीं दिया यश भारती सम्मान

लखनऊ ( अतुल्य लोकतंत्र समाचार ): अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल (Dr Lalji Prasad Nirmal) ने मंगलवार को लखनऊ (Lucknow) में प्रेस कांफ्रेंस कर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर जमकर हमला बोला. लालजी प्रसाद निर्मल ने यहां तक कहा दिया कि अखिलेश यादव भारतीय राजनीति के औरंगजेब (Aurangzeb) हैं, जिसने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को राजनीति से बेदखल कर उन्हें घर में बैठने के लिए मजबूर कर दिया। ऐसे मुगल शासक की विचारधारा के लोगों को प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।

अखिलेश यादव को लेकर डॉ. निर्मल ने आगे कहा कि आंबेडकर के मानने वालों से अखिलेश यादव नफरत करते हैं। वह केवल वोटबैंक के लिए समय-समय पर दिखावा करते रहते हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार में कुल 195 लोगों को यशभारती पुरस्कार दिए गए, इसमें से एक भी दलित विद्वान नहीं थे. यह दिखाता है कि वह केवल मुगल मानसिकता से काम करते हैं।

डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने अखिलेश यादव की राजनीति को परिवार और एक जाति विशेष की राजनीति बताया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी में दलितों का कोई स्थान नहीं है।उनकी पार्टी में अनुसूचित जाति मोर्चे का कोई अध्यक्ष तक नहीं है. यही हाल उनकी उत्तर प्रदेश की सरकार में भी था। दलितों की आवाज को दबा दिया जाता था. मायावती से निजी शत्रुता का बदला अखिलेश यादव ने दलितों से लिया। दलितों से इतनी नफरत थी कि उन्होंने गैरदलितों को अनुसूचित जाति आयोग और वित्त निगम का अध्यक्ष तक बना दिया.
अखिलेश को हवाई नेता समझता है गरीब, किसान
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तो अपना जन्मदिन तक देश में नहीं मनाते हैं, ऐसे नेताओं को हमारा गरीब, किसान, हाशिए का समाज हवाई नेता समझता है। वह दिन दूर नहीं, जब अखिलेश यादव पूरे देश में कहीं से भी चुनाव नहीं जीत पाएंगे। वह चुनाव जीतने के लिए, ऐसा लोकसभा क्षेत्र चुनते हैं, जहां उनके जातियों की संख्या सबसे अधिक हो, लेकिन उनका सजातीय समाज भी अब जान गया है कि वह वोट भले ही पूरे समाज का लेते हैं, लेकिन वह केवल परिवार की राजनीति करते हैं. केवल परिवार का ही भला करते हैं।

डॉ. निर्मल ने कहा कि अब वक्त आ गया है, जब जातिवादी राजनीति और परिवारवादी पार्टियों को नकार दिया गया। फर्जी समाजवाद और फर्जी बहुजनवाद के खतरों से वे पूरे प्रदेश के दलित समाज को अवगत कराएंगे।

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