कोचिंग सेंटर में था तबाही का मंजर, केतन की दिलेरी ने बचाईं कई जिंदगी

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Surat/Atulya Loktantra : गुजारत के सूरत की तक्षशिला इमारत में लगी आग की तस्वीरें इतनी भयानक हैं कि देखकर सिहरन होती है, लेकिन जब यहां आफत मची थी, उसी वक्त एक बहादुर शख्स दिखा, जिस दिलेरी की बदौलत कई लोगों की जान बच सकी. इस दिलेर शख्स का नाम केतन है. केतन ने फायर बिग्रेड पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया.

दरअसल, सूरत के सरथना इलाके में तक्षशिला कॉम्लेक्स के पास ट्रांसफॉर्मर में चिंगारी उठी, चिंगारी से आग लगी और ट्रांसफॉर्मर धू-धू कर जलने लगा. आग तेजी से फैली. कुछ ही मिनट हुए थे कि आग ने तक्षशिला कॉम्पलेक्स को अपनी जद में ले लिया. अबतक तक्षशिला कॉम्प्लेक्स के भीतर मौजूद लोग मौत की आहट से बेखबर थे. चौथी मंजिल पर बच्चे पढ़ रहे थे.

जब तक तीसरी और चौथी मंजिल के लोगों को मालूम चलता कि आग लगी है, तब तक इमारत धुआं धुआं हो उठी थी. धुएं का ये गुबार देखकर बहुत आसानी से कहा जाता सकता था कि इमारत के भीतर फंसे लोगों का बचना नामुमकिन था. बच्चों को मालूम चला कि इमारत आग की जद में है. तुरंत बच्चे नीचे की ओर भागे, मगर नीचे सीढ़ियां लकड़ी की थीं और वो जलकर खाक हो चुकी थीं.

बच्चों को कुछ नहीं सूझा. सामने आग की शक्ल में मौत थी. मौत से बचने के लिए बच्चे इमारत से कूदने लगे. इमारत से कूदते बच्चों को मालूम नहीं था कि नीचे गिरकर उनका क्या होगा. मगर वो कूद रहे थे. बच्चों को मौत के आगोश में देखकर एक बहादुर शख्स सामने आया. इसका नाम केतन है. वो इमारत के हिस्से में दीवार के सहारे खड़ा हुआ. ये सोचकर कि बच्चों की जान बचा लेगा. एक बच्ची को उसने सहारा देने की कोशिश की, मगर लड़की का बैलेंस बिगड़ा वो नीचे गिर गई, दूसरे बच्चे के साथ यही हुआ.

इसके बाद केतन ने बहुत सलीके से बच्चों को उतारना शुरु किया. पहले इस लड़की को नीचे उता फिर दूसरे बच्चे को. केतन ने बताया कि मुझे नहीं पता था कि क्या करना है. मैंने सीढ़ी ली. पहले बच्चों को बाहर निकालने में मदद की. 8-10 लोगों को बचाने में कामयाब भी रहा. बाद में मैं 2 और छात्रों को बचाने में कामयाब रहा. आग लगने के 40-45 मिनट के बाद फायर ब्रिगेड आई.

यानी 40-45 मिनट की देरी से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच गई. आग बुझाने का सिलसिला शुरु हुआ. आग बुझी तो तक्षशिला कॉम्लेक्स मरघट में तब्दील हो चुका था. इमारत खाक हो चुकी थी. आस पास की गाड़ियां राख हो चुकी थीं. दिन ढलते ढलते फोरेंसिक टीम पहुंच चुकी थी.

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