अमृत जल योजना के तहत हो रहे निर्माण कार्यो के अधर में लटकने से शहर वासियों का जीवन नर्क से भी बदतर

पलवल: ठेकेदारों और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते करीब 200 करोड़ रुपये की अमृत जल योजना के तहत हो रहे निर्माण कार्यो के अधर में लटकने से शहर वासियों का जीवन नर्क से भी बदतर हो गया है। जगह जगह पर रास्तों को खोदकर उनमें सीवरेज लाइन डालकर छोड़ दिया गया है जिसके चलते वहां से वाहन तो क्या लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
ठेकेदारों और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही :
नगर परिषद की सीमा के अंदर रहने वाले लोगों को पेयजल आपूर्ति के लिए अमृत जल योजना अगस्त 2018 में शुरू की गई थी। और इसका पूरा काम मार्च 2020 में पूरा हो जाना था लेकिन वर्ष 2021 खत्म होने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इस योजना आधे से ज्यादा काम अटका पड़ा है। अब एक बार फिर से इस योजना के पूरा होने का समय है मार्च 2022 तक बढ़ा दिया गया है जिसका हवाला दिया गया है कि कोरोना के चलते यह काम देरी से हो रहा है। इस योजना में पहले जो एजेंसी काम कर रही थी उस पर काम में देरी करने को लेकर विभाग की तरफ से 12 करोड़ 79 लाख रुपए का जुर्माना लगाने की कार्रवाई भी जा चुकी है। योजना के मुताबिक पेयजल सप्लाई व सीवरेज पर 197 करोड़ रुपये खर्च किए जाने है। इसमें पानी की 130 किलोमीटर लंबी तथा सीवरेज की 150 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जानी है। जोधपुर व फिरोजपुर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हो चुका है, जबकि किठवाड़ी में बनाए जाने वाला ट्रीटमेंट प्लांट कागजी कार्रवाई में उलझकर रह गया है। अभी तक पानी की 40 किलोमीटर और सीवरेज की मात्र 20 किलोमीटर की पाइप लाइन के लिए खुदाई की गई है। पेयजल के लिए 27 ट्यूबवैल लगाए जाने है, जबकि अब तक मात्र एक ट्यूबवैल लगा है तथा दो पर काम जारी है। बूस्टर बनाने का काम भी अधर में लटका हुआ है। गांव कुसलीपुर नंबर एक, कुसलीपुर नंबर दो, धौलागढ़, काशीपुर, मोहन नगर, कैलाश नगर, राजीव नगर, अगवानपुर, फिरोजपुर आदि क्षेेत्र में पेयजल व सीवरेज की लाइन बिछाने के लिए खुदाई कर दी गई है। खुदाई के कारण गलियों में पानी, कीचड़ भरा हुआ है और लोगों का रास्ता निकलना दूभर हो गया है। चौतरफा कीचड़ ही कीचड़ नजर आता है। लोगों को आते-जाते समय खोदे गए गड्ढों में गिरने का भय सताता रहता है। सीवर के लिए खोदे गए गड्ढे लोगों के जी का जंजाल बन गए हैं। खोदे गए गड्ढों में बारिश का पानी भरा हुआ है, जिसमें छोटे बच्चों के डूबने का डर भी लोगों में बना हुआ है। खुदाई के कारण आस-पास की मिट्टी दरकने लगी है। सीवर व पानी के लिए अलग-अलग गड्ढे खोदे जाने से गलियों की हालत निरंतर बदतर होती जा रही है।

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