महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने हेतु फल-सब्जी परिरक्षण प्रशिक्षण आयोजित

पलवल ( अतुल्य लोकतंत्र ):चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के अर्न्तगत कृषि विज्ञान केन्द्र, मण्डकौला द्वारा केन्द्र परिसर पर दिनांक 8-12 नवम्बर तक ‘‘फल-सब्जी प्रसंसकरण व अचार बनाने’’ पर आयोजित किये गये पांच दिवसीय व्यवसायिक प्रशिक्षण शिविर का आज समापन हो गया। इसमें 30 महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रतिभागियों को इस कार्य के गुर बताते हुए कुषि विज्ञान केन्द्र, मण्डकौला की जिला विस्तार विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) डा0 कान्ता सभरवाल ने कहा कि भारत विश्व में फल-सब्जी उत्पादन में द्वितीय स्थान पर होने के बावजूद प्रसंस्करण नगण्य है। इसे बढ़ाने की अपार सम्भावनाएं है क्योंकि प्रसंस्कृत फल-सब्जी व खुम्ब की देश-विदेश में अत्याधिक मांग है। उन्होने महिलाओं को लहसुन व गााजर का अचार बनाना सिखाया।

प्रशिक्षण में मिली-जुली सब्जियों, लहसुन, नींबू, लाल मिर्च, गाजर, आंवला, और नींबू के छिलकों के अचार के अतिरिक्त सेब का जैम, टमाटर का कैचअप, आंवले का मुरब्बा व कैण्डी, नींबू व अमरुद का स्कवैश, गाजर का जैम व फल-सब्जियों के सूखेे व फ्रोजन प्रोडक्ट आदि अनेक प्रसंस्कृत उत्पाद प्रतिभागियों से स्वयं बनवाकर सिखाए। कार्यक्रम के दौरान केन्द्र के वरिष्ठ समायोजक डा. डी. वी. पाठक व कार्यक्रम के संयोजक व बागवानी विशेषज्ञ डा. आर. एस. सैनी के अतिरिक्त कृषि महाविद्यालय व अनुसन्धान केन्द्र, बावल के डा0 मुकेश कुमार व डा. मनोज कुमार व बागवानी वैज्ञानिक डा. रामभगत गुप्ता, के.वी.के. उजवा, दिल्ली के डा. रीतु सिंह व डा. एस. के. तिवारी, के.वी.के., झज्जर की तकनीकी सहायक(सब्जी विज्ञान)डा. प्रीति यादव ने विभिन्न प्रसंसकृत उत्पाद बनाने की जानकारी दी। कार्यक्रम के अन्तिम दिन के0वी0के0 मण्डकौला के बागवानी वैज्ञानिक डा0 सैनी “फूड सेफटी स्टैण्डर्डस अथारिटी आफ इण्डिया” के खाद्य सुरक्षा व गुणवत्ता मानकों के बारे में भी बताया। डा. पाठक ने प्रसंस्कृत उत्पादों के खराब होने के कारण और प्रसंस्करण उपरान्त भण्डारण के दौरान सुरक्षित रखने हेतु विभिन्न परिरक्षको के प्रयोग सम्बन्धी जानकारी दी। इसके साथ-2 विपणन में कार्यकुशलता के उपाय बताये और कहा कि उत्पाद की गुणवत्ता और आर्कषक पैकिंग अच्छा मूल्य प्राप्त करने में अत्यन्त प्रभावी होती है। भाग लेने वाली महिलाओं में संतोष पृथला, कोमल फिरोजपुर झिरका, पूनम माण्डीखेड़ा, उषा खेड़ली दौसा, माधुरी अलावलपुर आदि मुख्य थी।

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