नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर निगमायुक्त यशपाल यादव मौन क्यों? : सुमित गौड़

भ्रष्टाचार पर निगमायुक्त की चुप्पी मजबूरी या संलिप्तता : सुमित गौड़
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़ ने नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर भाजपाईयों व निगमायुक्त को घेरा
फरीदाबाद।
 नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़ ने निगमायुक्त यशपाल यादव सहित भाजपाईयों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को सेक्टर-10 स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्र्रेस प्रवक्ता सुमित गौड़ ने कहा कि जो अधिकारी कभी कांग्रेस सरकार में अपने कार्य के लिए पूरे हरियाणा में विख्यात था, वही अधिकारी भाजपा सरकार में निगमायुक्त जैसे पद पर आसीन होने के बावजूद निगम में फैले भ्रष्टाचार को लेकर बेबस है। उन्होंने कहा कि इसे निगमायुक्त की मजबूती या संलिप्ता कही जा सकती है क्योंकि मजबूरी इसलिए कही उनको भाजपा विधायकों या मंत्रियों का दबाव है या फिर भ्रष्टाचार में उनकी संलिप्तता हो? हालांकि उनके कार्यकाल को देखकर इसकी संभावनाएं कम ही है। श्री गौड़ ने कहा कि नगर निगम में आज भ्रष्टाचार इस कद्र हावी हो चुका है कि प्रापर्टी आईडी, लाईसेंस बनवाने, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सीवर-पानी के कनेक्शन या एनओसी लेने के लिए बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता, हर काम के रेट निर्धारित किए हुए है, बिना पैसे लिए कर्मचारी किसी भी फाईल को छूते तक नहीं है। उन्होंने निगमायुक्त को चेताते हुए कहा कि वह स्वयं एक आम आदमी बनकर निगम में किसी भी विंडो पर काम करवाने के लिए चले जाए, अधिकारी व कर्मचारी उनसे बिना रिश्वत लिए काम नहीं करेेंगे, इससे साबित होता है कि भाजपा सरकार के 8 सालों में भ्रष्टाचार निरंतर बढ़ा है, इस सरकार ने केवल लोगों को जातिगत आधार पर बांटने का काम किया है, स्मार्ट सिटी फरीदाबाद अब भ्रष्टाचार सिटी बनकर रह गई है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़ ने उदाहरण देते हुए कहा कि नगर निगम में तैनात पूर्व इंस्पेक्टर हिम्मत खान की पत्नी शाईमन के आप्रेशन की 4.50 लाख रूपए की राशि के क्लेम को पास करवाने के लिए उनके पुत्र आरिफ से भी निगम अधिकारियों ने रिश्वत की मांग कर दी, लेकिन जब उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप किया तो बिना रिश्वत के आरिफ की मांग के क्लेम को पास किया गया। इतना ही नहीं बल्कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी नगर निगम में तैनात कर्मचारी 10-10 हजार रूपए तक रिश्वत ले रहे है, मानो निगम कर्मचारियों में इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। सुमित गौड़ ने कहा कि नहरपार, ओल्ड फरीदाबाद, बडखल, एनआईटी क्षेत्रों में अनेकोंनेक अवैध निर्माण निगम अधिकारियों की सांठगांठ से हो रहे है, लेकिन जहां से निगम अधिकारियों को सुविधा शुल्क मिल जाता है, उन पर वह आंखें मूंद लेते है, जबकि अन्य को अवैध करार देकर गिरा देते है। सुमित गौड़ ने प्रशासन व सरकार को चेताते हुए कहा कि नगर निगम व अन्य सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ तो जुलाई 2022 से वह बारी-बारी सभी विभागों  कार्यालय के बाहर दरी बिछाकर लोगों की सुनवाई करेंगे और भ्रष्टाचार का विरोध करेंगे। उन्होंने आमजन से भी आह्वान किया कि वह भ्रष्टाचार को खात्मे के लिए उनके द्वारा शुरू किए जा रहे जनांदोलन में उनका सहयोग करें और भ्रष्ट अधिकारियों की जानकारी उन्हें देें ताकि उनका चेहरा बेनकाब किया जा सके।

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