चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव की अध्यक्षता में राज्य वित्तायोग की मंडल स्तरीय बैठक आयोजित

– ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों की आर्थिक मजबूती को लेकर हुआ मंथन

– मंडलायुक्त संजय जूनउपायुक्तों तथा निगमायुक्त ने दिए सुझाव

फरीदाबाद, 30 सितंबर। हरियाणा राज्य के छठे वित्त आयोग के चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव की अध्यक्षता में सूरजकुंड स्थित होटल राजहंस के कमेटी हॉल में मंडल स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार तथा आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए मंडलायुक्त, जिलों के उपायुक्तों, निगम आयुक्त व अन्य अधिकारियों से सुझाव लिये गए। राज्यों के सभी जिलों से सुझाव लेकर आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट सरकार को दी जाएगी। बैठक में मण्डलायुक्त संजय जून, फरीदाबाद के उपायुक्त जितेंद्र यादव, पलवल के उपायुक्त कृष्ण कुमार, नूह के उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह,  नगर निगम के आयुक्त यशपाल, आयोग सलाहकार आर के महत्ता, डॉ महिपाल सहित विभिन्न जिलों के अतिरिक्त उपायुक्त व जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मौजूद रहे।

आयोग के चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने कहा कि बैठक में रखे गए सुझावों के संदर्भ में प्रत्येक जिले से इस सप्ताह तक पूर्ण विवरण सहित रिपोर्ट आयोग को भेज दी जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों की मजबूती की दिशा में जरूरी कदम उठाना आयोग की प्राथमिकता है, इसके लिए सभी जिलों में ऐसे क्षेत्रों या मदों की पहचान की जाए, जहां खर्च तो बहुत ज्यादा है, लेकिन उसके लाभ काफी सीमित हैं। निकायों की आर्थिक मजबूती के लिए आय के संसाधन बढ़ाए जाने चाहिए। इसके लिए सभी अधिकारी विभिन्न बिंदुओं पर कार्य करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करें। जिले में यदि कोई अच्छी पहल की गई है, तो इसकी जानकारी रिपोर्ट में शामिल की जाये। आयोग द्वारा ग्रामीण व शहरी निकाय संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सिफारिशें देनी है ताकि यह संस्थाएं वित्त मामलों में आत्मनिर्भर हो सके। चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने कहा कि देश में कुछ राज्य ऐसे हैं जहां के स्थानीय निकाय स्कूल, महाविद्यालयों तथा अस्पतालों का संचालन भी करते हैं, इसलिए प्रदेश के जिलों में भी इस प्रकार की संभावनाओं पर कार्य किया जा सकता है।

बैठक में मंडलायुक्त संजय जून ने  कहा कि गांवों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में वहां बैंकविट हॉल, रिजोर्ट, शॉपिंग क्षेत्र इत्यादि स्थापित कर इन्हें स्थायी आय का माध्यम बनाया जा सकता है। इस प्रकार से मिलने वाली राशि को गांवों में ही कौशल विकास केंद्र, पुस्तकालय, कोचिंग संस्थान, वैलनेस सेंटर तथा खेल गतिविधियों पर खर्च किया जा सकता है।

उपायुक्त जितेंद्र यादव ने बैठक में अपने सुझाव देते हुए कहा कि स्थानीय निकायों की मजबूती के लिए कर वसूली, यूजर चार्ज, अन्य प्रकार की फीस की वसूली को लेकर प्रणाली मजबूत होनी चाहिए। ग्राम पंचायतों के पास पर्याप्त स्टाफ होना चाहिए और पंचायतों के कार्यों में आईटी तथा जीआईएस मेपिंग का समावेश होना चाहिए। पंचायती राज संस्थाओं के कार्यों के लिए अधिकारियों को स्थायी तौर पर लगाया जाना चाहिए, न कि उन्हें अतिरिक्त चार्ज दिया जाए। गांवों में होने वाली बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग हो तथा ग्राम सभा के अनुमोदन के बाद ही विकास कार्यों के लिए राशि की अदायगी की जाए। उन्होंने गावों का अलग से आपदा प्रबंधन प्लान बनाए जाने, पंचायती राज संस्थाओं में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, पीएचसी व सीएचसी अपग्रेड करने, नागरिकों की प्रतिभागिता सुनिश्चित करने तथा विकास कार्यों का प्री-ऑडिट करवाने बारे महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

पलवल के उपायुक्त कृष्ण कुमार ने ग्रामीण व शहरी निकाय संस्थाओं को मजबूत करने  का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि गांवों की सडक़ें पंचायतों द्वारा ही बनाई जानी चाहिए। विकास कार्यों की ऑडिटिंग में ग्राम सभाओं की अहम भूमिका होनी चाहिए।

नूह के उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह ने सुझाव दिया कि विकास कार्यों के लिए जवाबदेही का तय होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित होने वाले होटल, बैंकविट हॉल, स्कूल इत्यादि के लिए पंजीकरण शुल्क लगाया जा सकता है।

निगमायुक्त यशपाल ने सुझाव दिया कि स्थानीय निकायों में विभिन्न परियोजनाएं इकोफ्रेंडली होनी चाहिए। निगम की खाली पड़ी भूमियों पर सौर ऊर्जा प्लांट व इस प्रकार की अन्य गतिविधियां आय को बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। निगमायुक्त ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न व्यवसायों के लिए ट्रेड लाइसेंस फीस में एकरूपता होनी चाहिए।

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