रामनवमी-यज्ञ महोत्सव की पूर्व संध्या पर विशाल शोभा-यात्रा का आयोजन

Faridabad/Atulya Loktantra : रामनवमी-यज्ञ महोत्सव के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर सतयुग दर्शन वसुन्धरा, गाँव भूपानी, फरीदाबाद, में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने हजारों की संख्या में समिमलित हो पूर्ण हर्षोल्लास के साथ इस अद्भुत नजारे का आनंद उठाया। इस अवसर पर शोभा-यात्रा जब समभाव-समदृष्टि के स्कूल ध्यान-कक्ष में पहुँची तब वहाँ उपस्थित सभी सजनों को संबोधित करते हुए ट्रस्ट के मार्गदर्शक सजन ने कहा कि सजनों मानव जीवन बड़ा अनमोल है। एक विशिष्ट उद्देश्य के निमित्त इस जीवन का धरती पर प्रार्दुभाव हुआ है। वह उद्देश्य है-समभाव-समदृष्टि की युक्ति अनुसार सर्वव्याप्त निज परमात्म स्वरूप की पहचान कर, उसी के निमित्त व उसी के हु1मानुसार निष्काम व सजन भाव से इस चराचर जगत की सेवा करना व इस प्रकार अपने मन-वचन-कर्म द्वारा सत्य को धर्मसंगत प्रतिष्ठित कर, अन्यों को भी तद्नुरुप सदाचरण अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए परोपकार कमाना।

सजन जी ने कहा कि समभाव-समदृष्टि के इस स्कूल में कराई जा रही आत्मिक पढ़ाई द्वारा भी जीवन के इस प्रधान लक्ष्य को आत्मसात् कर अपना जीवन सकार्थ करने के प्रति निरंतर प्रेरित किया जा रहा है परन्तु जैसा कि कहते हैं कि अंधकार में तीर छोडऩे पर लक्ष्यभेद करना संभव नहीं हो पाता उसी प्रकार पर्याप्त सूझबूझ, दृढ़ता, एकाग्रचित्तता व मननकारी के अभाव में हम अज्ञानी, आदत से मजबूर होकर, द्वि-द्वेष, आलस्य, निद्रा, कलह, वाद-विवाद, वैभव, ऐश्वर्य, मान-मर्यादा, झूठी शान-ओ-शौकत, प्रतिस्पर्धा, आमोद-प्रमोद व अनेकानेक व्यसनों में समय बरबाद करने के कारण अपने लक्ष्य को नहीं भेद पाते और विघ्न उपस्थिति होते ही तुरंत विचलित हो जाते हैं। परिणामत: प्रयत्न को अधूरा छोड़ उद्देश्य पूर्ति से वंचित रह जाते हैं यानि दुर्लभ मानव जीवन पाकर भी असली मकसद को प्राप्त करने का अवसर खो बैठते हैं। यहाँ उन्होंने अपनी बात पर बल देते हुए उपस्थित सजनों को समझाया कि इस अनमोल मानव जीवन को प्राप्त कर उसे सँवारने का अवसर बार-बार हाथ नहीं आता और जो आए अवसर को असावधानी या अचेतनता के कारण गँवा बैठता है वह मूर्ख बाद में पछताता है।

सजन जी ने कहा कि मोह-माया के बंधन तोड़ यानि अपने मन अपनी इन्द्रियों, अपनी इच्छाओं/कामनाओं पर नियन्त्रण स्थापित कर, जीवन के तमाम झमेलों, विपरीत परिस्थितियों व अंतर्निहित बुराईयों पर विजय पा मोक्ष प्राप्त कर लो। श्री सजन जी ने कहा कि मानो यही मुक्ति सर्वश्रेष्ठ है व परम संतोष व शांति की प्राप्ति का अमोघ साधन है। इसी की प्राप्ति होने पर जीवन सार्थक प्रतीत होता है। अतैव अपने आप पर विश्वास यानि परमात्मा में विश्वास को विजय प्राप्ति का सबसे बड़ा समबल मान हिममत से ऊपर उठो और अविलमब सद्ज्ञान प्राप्त करने का पुरुषार्थ दिखाओ। इस तरह अपने आप, अपने अज्ञान का नाश कर अपनी वृत्ति, स्मृति, बुद्धि व भावों के ताणे-बाणे को निर्मल बना जगत में विचार ईश्वर अपना आप के भाव से विचरते हुए इस परम लक्ष्य को पा अपना जीवन सफल बना लो।

संस्था की प्रबन्धक न्यासी रेशमा गांधी ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी रामनवमी महायज्ञ में काफी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से भाग लेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख रेलवे-स्टेशनों एवं बस-अड्डों से भक्तजनों के लिए हर आधे घंटे में स्पेशल बसों का भी इंतजाम किया गया है। श्रद्धालुओं के रहने, खाने-पीने व अन्य सुविधाओं के प्रबंधन हेतु २०० से भी अधिक स्वयं सेवक कार्यरत हैं।

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