25 से कम बच्चों वाले स्कूलों के 1 किलोमीटर दायरे में कोई सरकारी स्कूल नहीं, 262 विद्यार्थियों के दाखिले पर संशय

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प्रदेश में 25 विद्यार्थियों से कम संख्या वाले राजकीय प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया है। इन स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को एक किलोमीटर के दायरे में दूसरे राजकीय स्कूल में पढ़ाया जाएगा। जिला में ऐसे 21 प्राइमरी स्कूल हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम हैं। जिला के 25 से कम संख्या वाले स्कूलों के एक किलोमीटर के दायरे में कोई स्कूल भी नहीं है।

ऐसे में अभिभावकों के सामने बच्चों को पढ़ाने की चिंता पैदा हो गई है। कम संख्या के कारण स्कूल बंद हुए तो अभिभावकों के पास बच्चे को स्कूल भेजने के लिए दूसरा विकल्प भी नहीं है। हालांकि अभी शिक्षा विभाग द्वारा रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जो निदेशालय को भेजी जाएगी।

नहीं होंगे नए दाखिले

25 से कम संख्या वाले स्कूलों में नए सत्र से दाखिले नहीं होंगे। शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में नियुक्त किया जाएगा। स्कूल को मर्ज या बंद होने के बाद स्कूल भवन में प्ले स्कूल खोले जाएंगे या पंचायत को दिए जाएंगे। जिसे पंचायत अपने अनुसार प्रयोग करेगी। स्कूल के सामान को जरुरत अनुसार दूसरे स्कूलों में प्रयोग किया जाएगा। जिला के कम संख्या वाले स्कूलों के एक किलोमीटर दायरे में दूसरा स्कूल नहीं हैं। ऐसी स्थिति में निदेशालय से जवाब आने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सरकार छीन रही मौलिक अधिकार

राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिला प्रधान रोशनलाल पंवार ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों से उनका मौलिक अधिकारी छीनना चाहती है। शिक्षा के मौलिक अधिकार के तहत विद्यार्थियों को उनके घर के एक किलोमीटर दायरे में ही पहली से पांचवी की शिक्षा दी जानी अनिवार्य है। सरकार स्कूलों की स्थिति सुधारने की बजाय बंद करके अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहती है। प्राथमिक शिक्षक संघ इस निर्णय के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगा।

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