निगम में एक और गड़बड़ी: सरकार से मंजूरी ली नहीं, और चीफ इंजीनियर ने बिल्डिंग निर्माण की लागत 42 करोड़ से बढ़ाकर 52 करोड़ कर दी

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नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर हर दिन कोई न कोई गड़बड़ी सामने आ रही है। 50 करोड़ के घोटाले की अभी जांच चल ही रही है कि निगम में एक और गड़बड़ी सामने आई है। यहां तैनात रह चुके एक चीफ इंजीनियर ने सरकार से मंजूरी लिए बगैर सीएम अनाउंसमेंट के तहत सेक्टर-12 में बन रहे नगर निगम कार्यालय के बिल्डिंग निर्माण की लागत 42 से बढ़ाकर 52 करोड़ रुपए कर दी है। इसकी जानकारी हाेने पर निगम कमिश्नर यशपाल यादव ने मौका मुआयना कर सरकार को पत्र लिख इस गड़बड़ी की जानकारी गे दी है।

माना जा रहा है इस मामले में बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। हैरानी की बात यह है कि इस भवन का अभी तक केवल बेसमेंट ही बन पाया है। जबकि ठेकेदार ने 21 करोड़ का बिल पेमेंट के लिए निगम में लगा रखा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बाकी बचे पैसों में सात मंजिला इमारत कैसे बनेगी। मुख्यमंत्री ने सीएम अनाउंसमेंट के तहत 7 जून 2015 को सेक्टर-12 में नया निगम मुख्यालय बनाने की घोषणा की थी। इसे सात मंजिला बनाया जाना है। इसमें बेसमेंट के साथ-साथ पार्षदों के लिए अलग कमरे, अधिकारियों के लिए कमरे, कांफ्रेंस हॉल आदि का प्रावधान है। नगर निगम ने करीब 42 करोड़ 40 लाख का एस्टीमेट बना ठेकेदार को काम सौंप दिया था। ठेकेदार ने 25 अक्टूबर 2018 को काम शुरू कर दिया था। अक्टूबर 2021 में इसे पूरा करना है। लेकिन अभी तक काम आधा भी नहीं हाे पाया है।

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