भगवान भरोसे ट्रेन का सफर:स्टेशनों पर न तो टेंपरेचर की जांच हो रही न ही सेनिटाइज, फरीदाबाद और बल्ल्भगढ़ से गुजर रहीं रोज 35 ट्रेनें

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फरीदाबाद और बल्ल्भगढ़ रेलवे स्टेशन पर रेलवे की बड़ी लापरवाही सामने आयी है। यहां से जाने वाले यात्रियों का न तो टेंपरेचर चेक किया जा रहा है और न ही यात्रियों का सामान सेनिटाइज हो रहा है। यात्री भगवान भरोसे ट्रेनों में सफर कर रहे हैं। दोनों स्टेशनों की बात करें तो रोज 35 एक्सप्रेस व मेल ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। रेलवे अधिकारी ऊपर के आदेश के इंतजार में बैठे हैं। रेलवे अधिकारियेां का कहना है कि उनके पास न तो मैनपावर है और न ही ऊपर से कोई ऐसा करने का आदेश हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि यदि कोई संक्रमित यात्री ट्रेन में सफर करता है और उससे अन्य यात्री प्रभावित होंगे तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।

फरीदाबाद में हर दिन संक्रमितों का रिकार्ड बन रहा है। तेजी से लोग संक्रमित हो रहे हैं। इस दौरान ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ स्टेशन पर रुकने वाली एक्सप्रेस व मेल ट्रेनों से सैकड़ों यात्री सफर कर रहे हैं। लेकिन औद्योगिक नगरी के इन दोनों रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा के कोई उपाय नहीं है।

पहली वाली व्यवस्था कर दी गई बंद
2020 में जब कोरोना संक्रमण का खतरा तेजी से फैल रहा था तो बड़ी संख्या में प्रवासी लोगों को उनके राज्यों में भेजा जा रहा था। उस दौरान रेलवे ने यात्रियों के सामान को सेनिटाइज करके उनका टंपरेचर चेक करके ही ट्रेन में बैठने की अनुमति देते थे। लेकिन अब न तो सामान सेनिटाइज हो रहा है और न ही शरीर का तापमान चेक किया जा रहा है। सबकुछ भगवान भरोसे हो रहा है।

इन ट्रेनों से लोग कर रहे सफर

फरीदाबाद स्टेशन से रोज सचखंड एक्सप्रेस, गीता जयंती, आगरा इंटरसिटी एक्सप्रेस, पश्चिम एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, जबलपुर एक्सप्रेस, ऋषिकेश स्पेशल, मालवा एक्सप्रेस, पंजाब मेल एक्सप्रेस, देहरादून एक्सप्रेस समेत 35 ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। इन ट्रेनों बड़ी संख्या में यात्री भी सफर कर रहे हैं लेकिन सुरक्षा के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। स्टेशनों पर बस टीटीई स्टाफ लगाकर टिकट जरूर चेक किए जा रहे हैं।

अधिकारी बोले, ऊपर से नहीं है कोई अादेश

स्टेशन अधीक्षक एके गोयल का कहना है कि टंपरेचर चेक करने और सामान सेनिटाइज करने का अभी तक ऊपर से कोई आदेश नहीं आया है और न ही हमारे पास कोई मैनपाॅवर है। ऐसे में हम अपने स्तर से कुछ नहीं कर सकते। यदि रेलवे संसाधन उपलब्ध करवाता है तो उसे लागू किया जाएगा।

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