धान अवशेषो को न जलाएं किसान, फसल अवशेष का खेतों में ही करें प्रबंधन : उपायुक्त

पलवल, 16 नवंबर / अतुल्य लोकतंत्र:उपायुक्त कृष्ण कुमार ने जिला के किसानों से आह्वाहन किया कि कृषक धान अवशेषो को न जलाएं, क्योंकि पराली जलाने से मानवीय स्वास्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा मनुष्यों विशेषकर बच्चे व बुजुर्गो को सांस लेने में परेशानी आती है। पराली जलाने से भूमि की ऊर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है। भूमि के मित्र कीट नष्ट हो जाते है। भूमि की आद्रता कम हो जाती है व मिट्टी बिखर जाती है। साथ ही साथ पराली जलाने से उत्पन्न धुंए से सडक़ दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है तथा वायुमंडल प्रदूषित हो जाता है।

इन फसल अवशेषों को जमीन में मिलाने से भूमि की ऊर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। मित्र कीट नष्ट होने से बच जाते है। पराली प्रबंधन के लिए सरकार व्यक्तिगत व सी.एच.सी. मॉडल पर 50 प्रतिशत व 80 प्रतिशत अनुदान पर एम्पलीमेंटस उपलब्ध करवा रही है, जिससे फसल अवशेष का खेत में ही प्रबंधन किया जा सकता है तथा किसान पराली की गांठ बनाकर ब्रिकी कर सकता है, जिसका उपयोग पशुचारा व भट्टियों में और पैकेजिंग मैटेरियल में किया जा सकता है। इस पर किसान को सरकार अनुदान भी दे रही है।
उपायुक्त ने बताया कि अगर किसान पराली का खेत में ही प्रबंधन करता है तो उससे मृदा ऊर्वरता में बढोतरी, पानी की बचत, खरपतवार नाशक दवाओं की बचत, मृदा मित्र कीटो की बचत होती है। इस प्रकार कृषक पराली प्रबंधन करके मनुष्य व पशुओं के स्वास्थ लाभ, वातावरण का शुद्विकरण, भूमि का ऊपजाउपन आदि लाभ समस्त मानव जाति को दे सकता है तथा पराली जलाने के कारण जुर्माने से होने वाले वित्तीय हानि से बच सकता है। उन्होंने सभी कृषकों से आह्वाहन किया है कि वे पराली प्रबंधन करके मानव स्वास्थ, भमि की ऊर्वरता व स्वच्छ वातावरण प्रदान करने में सहयोग करें। इस संबंध में उच्चतम न्यायालय ने निर्देश जारी करके भी कहा गया है कि आगामी दो सप्ताह तक किसान किसी खेत में फसल अवशेषो को आग न लगाएं।

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