पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति समर्पित सेवा भाव से मिलता है नैसर्गिक आनन्द- डॉ. रवि हान्डा

Faridabad :  मानव रचना एफ एम 107.8 पर “फरीदाबाद की आवाज” फहीम के साथ में पर्यावरणीय विषयों पर चर्चा करते हुए इन्स्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एण्ड टेक्नोलॉजी फरीदाबाद के निदेशक डॉ. रवि हान्डा ने कहा कि हमारे जीवन में स्वच्छ पर्यावरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। वर्तमान परिवेश में पर्यावरणीय समस्याओं को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। डॉ. रवि हान्डा ने कहा कि शिक्षा जगत इस विषय को काफी गंभीरता लेते हुए बुनियादी स्तर से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर पर्यावरणीय शिक्षा प्रदान कर रहा है। युवाओं को विभिन्न पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति न सिर्फ जागरूक किया जाता है बल्कि उन समस्याओं के समाधान के लिए तथ्यगत अध्ययन एवं शोध किए जा रहे हैं। छात्रों को पर्यावरण के क्षेत्र में आजीविका की भी अपार संभावनाएँ हैं। डॉ. रवि हान्डा ने इस लाइव कार्यक्रम में अपने संस्थान, आई एम टी के प्राध्यापक डॉ. आर एन सिंह की पर्यावरण के प्रति समर्पित भाव से शिक्षण एवं प्रशिक्षण के साथ व्यावहारिक क्रियान्वयन की सरल पद्धति की सराहना किए। उनहोंने कहा कि डॉ. आर एन सिंह के पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता का लाभ संस्थान के साथ हीं आस पास के गाँवों एवं छात्रों के माध्यम से पूरे समाज को मिल रहा है। इस अवसर पर संस्थान के प्राध्यापक एवं यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. आर एन सिंह ने दो घंटे के इस कार्यक्रम में वायु, जल एवं खाद्य पदार्थों को प्रदूषण मुक्त करने के तथ्यगत एवं सरल उपायों पर विस्तृत चर्चा किए। डॉ. आर एन सिंह ने कहा कि प्रदूषण मुक्त पर्यावरण से बढ़कर प्राणियों का कोई मित्र नहीं है। डॉ. सिंह  ने कहा कि हमें जलवायु एवं मिट्टी की गुणवत्ता के अतिरिक्त विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सघन वृक्षारोपण करने की आवश्यकता है। जल संरक्षण के साथ हीं यमुना सहित विभिन्न पवित्र नदियों को अविरल और निर्मल बनाने की आवश्यकता है। कृषि एवं औद्योगिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन में किसान एवं उद्योगपत्तियों को मानवीय मूल्यों का पालन करना चाहिए जिससे आम जनता को विशुद्ध भोजन मिल सके। डॉ. आर एन सिंह ने शुद्ध वायु, शुद्ध जल एवं शुद्ध अन्न को सर्वश्रेष्ठ त्रिरत्न बताते हुए इनकी गुणवत्ता के लिए समग्र प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

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