कुमाउनी भाषा एवं साहित्य के संरक्षण और संवर्धन हेतु गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का सुन्दर आयोजन फ़रीदाबाद में सम्पन्न हुआ

फरीदाबाद। उत्तराखंडी दुधबोलियों कुमाउनी एवं गढ़वाली को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दिलवाने तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन के साथ समाज में उनकी जागरुक स्वीकार्यता हेतु आज कई जगह पर प्रयासों की कड़ी में कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति, नई दिल्ली द्वारा यह विशेष प्रयास 18 Sept 2022, रविवार को DAV Centenary College, NH3, NIT, फरीदाबाद में सांय 4 बजे से किया गया ।

कार्यक्रम की शुरूवात दीप प्रज्वलन से हुई जिसमें फरीदाबाद के वरिष्ठ शिक्षाविद और सामाजिक अग्रज श्री देवी प्रसाद भारद्वाज जी, गणेश जोशी जी, सी एम पपनें जी, कमला कापड़ी जी, यशपाल रावत जी, पूरन चंद्र कांडपाल जी, गिरीश बिष्ट हंसमुख जी, हर्ष सिंह बंगारी जी, महेन्द्र रौतेला जी, आनन्द सिंह जमनाल जी, भुवन बुधानी जी व कई अन्य वरिष्ठ व्यक्तिव उपस्थित रहे । तत्पश्चात कु. मेघा जोशी ने सुप्रसिद्ध कुमाउनी सरस्वती वंदना “दैंणी है जए माँ सरस्वती” की सुन्दर प्रस्तुति दे आयोजन को ऊर्जादायक आरंभ दिया ।

2 सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में पहले सत्र में कुमाउनी भाषा गोष्ठि और पुस्तक परिचर्चा तथा दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन रखा गया,,,

कुमाउनी भाषा पर गोष्ठि में वरिष्ठ पत्रकार श्री चारू तिवारी जी और फ़रीदाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार श्री आचार्य प्रकाश चन्द्र फुलोरिया जी द्वारा कुमाउनी भाषा पर विशेष वक्तव्य दिया गया । युवा लेखक और रामजस कालेज दिल्ली में प्रोफैसर डा. प्रकाश उप्रेती व वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्म निर्देशक मनोज चंदोला जी द्वारा सुप्रसिद्ध कुमाउनी लोकगायक और जनकवि स्व. हीरा सिंह राणा जी के समग्र रचना संसार पर प्रकाशित पुस्तक “लस्का कमर बांधा” पर उसके महत्त्व और राणा जी के जीवन संघर्ष पर अपने अपने विचार रखे । प्रथम सत्र की अध्यक्षता आदरणीय देवी प्रसाद भारद्वाज जी ने की तथा संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी श्री हेम पंत जी ने किया ।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित DAV Centenary College की प्रधानाचार्या डा. सविता भगत, वरिष्ठ मार्गदर्शक श्री देवी प्रसाद भारद्वाज जी ने प्रथम सत्र के अंत में अपने अपने विचार रखे तथा तत्पश्चात उनका आयोजन समिति द्वारा सम्मान भी किया गया ।

द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का संचालन युवा कवि और कार्यक्रम संयोजक नीरज बवाड़ी ने किया। कई प्रतिष्ठित और युवा कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया जिनमें श्री दिनेश छिमवाल जी रोहिणी, रघुवर दत्त शर्मा जी बुराड़ी, राजू पांडेय जी यमुना विहार, डा. पुष्पा जोशी जी ग्रेटर नोएडा, मीना पांडेय जी गाजियाबाद और कु. दीपशैलजा उप्रेती जी फरीदाबाद से उपस्थित रहे,, कुछ नव प्रतिभाओं ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की जिनमें संतोष जोशी, रमेश सोनी, जगदीश नेगी, किरपु बिष्ट, इत्यादि ने भी काव्य पाठ किया… साथ ही कुछ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी रही जिनमें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से पुरस्कृत सुप्रसिद्ध लोकगायिका श्रीमती आशा नेगी जी, लोकगायक प्रकाश आर्या व युवा प्रतिभा रमेश उप्रेती ने अपनी प्रस्तुतियां दीं ।

दिल्ली NCR के कई वरिष्ठ व्यक्तित्व और समाजसेवी इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे और कुमाउनी बोली भाषा को सामाजिक रूप से स्वीकार्यता और संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दिलवाने हेतु अपनी विशेष सहभागिता सुनिश्चित करेंगे । इस कार्यक्रम में फ़रीदाबाद की और दिल्ली NCR कई सामाजिक संस्थाओं का भी विशेष सहयोग रहा जिनमें कुमाऊँ सांस्कृतिक मंडल फरीदाबाद, कुमाऊँ भ्रातृ मंडल फरीदाबाद, कुमाऊँ मित्र वेलफेयर सोसायटी, अंजवाल फरीदाबाद, पर्वतीय कला केन्द्र नई दिल्ली तथा कुमाऊँ सांस्कृतिक एवं कल्याण संघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विशेष भूमिका निभाने हेतु DAV Centenary College के समस्त staff का विशेष धन्यवाद किया गया और वरिष्ठ स्टाफ मेंबर्स श्री आनन्द सिंह जमनाल जी, महेन्द्र सिंह बिष्ट जी व मोहिनी बिष्ट जी का विशेष सम्मान भी किया गया ।

कार्यक्रम का आयोजन कुमाउनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक समिति द्वारा किया गया जिसके संयोजक श्री चारू तिवारी, सह संयोजक डा. दीपक पंत, अध्यक्ष डा. मनोज उप्रेती, उपाध्यक्ष सुरेन्द्र हालसी, महासचिव सुरेंद्र सिंह रावत, सचिव संतोष जोशी, कोषाध्यक्ष राजू पांडेय व कार्यक्रम संयोजक नीरज बावड़ी हैं । समिति राष्ट्रीय स्तर पर पंजिकृत है जो कि विशेष रूप से कुमाउनी भाषा, उत्तराखंडी समाज और जन सरोकारों के प्रति समर्पित भाव से कार्यरत रहेगी ।

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