राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति से किया जाता है केस निपटाने का प्रयास : जिला एवं सत्र न्यायाधीश

पलवल (अतुल्य लोकतंत्र ) : मुकेश बघेल /जिला की तीनों अदालतों क्रमश: पलवल, होडल व हथीन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकारण पलवल के अध्यक्ष पुनीश जिंदिया के दिशा-निर्देशन तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पलवल के सचिव कुनाल गर्ग की देखरेख में राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों के निपटान हेतू जिला न्यायालय पलवल, होडल एवं हथीन की अदालतों में राष्ट्रीय लोक अदालतें लगाई गई। इन लोक अदालतों में कुल 4 हजार 383 केसों में से 2 हजार 286 केसों का निपटारा किया गया।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीश जिंदिया तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुनाल गर्ग द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जिला न्यायिक परिसर पलवल में सभी मामलों के निपटान के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.के. गर्ग, प्रधान पारिवारिक न्यायधीश कुबूद गुगनानी, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पूनम कवर, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट ज्योति मेहरा एवं प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट विकास वर्मा की न्यायिक पीठें पलवल में बनाई गई। इसी प्रकार होडल न्यायिक परिसर में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट दीपक यादव तथा हथीन न्यायिक परिसर में शताक्षी की न्यायिक पीठ को राष्ट्रीय लोक अदालत लगाने के लिए बैठाया गया। इसके अलावा वी.पी. पाठक चेयरमैन पब्लिक यूटिलिटी सर्विस एवं परमानेंट लोक अदालत के द्वारा भी प्री-लिटिगेटेड मुकदमों का निपटान किया गया। इन सभी न्यायिक पीठों में अधिवक्ता नारायण सिंह परमार, हंसराज, कमलेश तेवतिया, रणसिंह, महेश चंद्र, संदीप अग्रवाल और टेकचंद बतौर सदस्य पीठ शामिल हुए।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीश जिंदिया ने बताया कि नालसा की हिदायतानुसार केस की विभिन्न तारीखों से छुटकारा दिलाकर एक ही दिन केस को निपटाने का प्रयास किया जाता है। वैवाहिक संबंधी मामलों की सुनवाई में लोक अदालत के दौरान आमने-सामने बैठकर आपसी मन-मुटाव को दूर करने व केस को निपटाने का प्रयास किया जाता है। कोट तथा हालसा व नालसा के माध्यम से लोगों को राष्टï्रीय लोक अदालत में आपसी राजीनाम व सहमति से केसों को निपटाने के लिए जागरूक किया जाता है। जिन लोगों के केस अदालत में लंबित है और वे अपना केस आपसी सहमति से निपटाना चाहते हैं। ऐसे में वह व्यक्ति अपना केस राष्ट्रीय लोक अदालत के सुनवाई करने के लिए निवेदन कर सकता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में वाहन दुर्घटना मुआवजा, बैंक वसूली, राजीनामा योग्य फौजदारी मामले, बिजली एवं पानी के बिल संबंधी मामले, श्रम विवाद, सभी प्रकार के पारिवारिक विवाद, चैक बांउस, राजस्व मामले आदि को रखा गया।

सीजेएम कुनाल गर्ग ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में विवादों को सुलह एवं समझौते के आधार पर निपटाने के प्रयास किए गए, जिसके चलते राष्ट्रीय लोक अदालतों में पारिवारिक मामलों में 37 मे से 20 मामलों को सहमति से निपटाया गया। फौजदारी के 142 मामलों में से 84 मामलों का निपटारा हुआ। चैक बाउंस के 73 मे से 16 मामले आपसी सहमति से निपटाए गए। वाहन दुर्घटना के 73 मामलों में से 16 मामलों को निपटाया गया। बैंक वसूली के 1495 मामलों मे से 44 मामले निपटाए गए। इसी प्रकरा 169 अन्य दीवानी मामलों में से 114 मामले निपटाए गए। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर व्हीकल एक्ट/बिजली चोरी के 1559 मामलों की भी सुनवाई की गई। राष्टï्रीय लोक अदालत में केसों की सुनवाई के लिए आए लोगों ने कोविड-19 के प्रोटोकोल का पूरी तरह पालन किया। सभी लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए अदालतों की कार्यवाही संपन्न कराई गई।

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