भारत बंद से नहीं थमा कोरोना का कहर, हर दिन 1000 नए केस

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New Delhi/Atulya Loktantra : भारत में मंगलवार की सुबह कोरोना वायरस के मामलों में एक दिन का सबसे बड़ा उछाल दर्ज किया गया. एक ही दिन में कोरोना संक्रमण के 3,900 मामले सामने आए जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. इसके ठीक एक दिन पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया था कि Covid-19 का ग्राफ नीचे आ रहा है. 5 मई की दोपहर तक, भारत में 46,711 मामले दर्ज हुए हैं और अब तक 1,583 मौतें हो चुकी हैं. भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसने अब बहस छेड़ दी है कि 40-दिवसीय लॉकडाउन की प्रासंगिकता क्या रही? डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने पाया कि 25 मार्च को जिस दिन लॉकडाउन लागू किया गया था, उस दिन से लेकर 5 मई तक भारत में हर दिन कोरोना वायरस के औसतन 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं.

अगर लॉकडाउन के पहले और दूसरे चरण की तुलना करें तो दूसरे चरण में कोरोना वायरस के औसतन तीन गुना ज्यादा नये मामले दर्ज किए गए हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने सोमवार को कहा, “लॉकडाउन और दूसरे प्रतिबंधों के दौरान, हम कोरोना मामलों को अपेक्षाकृत नियंत्रित करने में सक्षम रहे हैं. कोरोना का ग्राफ अब नीचे आ रहा है.”

इसके उलट, डीआईयू ने पाया कि कोविड-19 का ग्राफ नीचे आना तो दूर, रोजाना नये मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. 25 मार्च को 606 मामले सामने आए थे. इसी दिन लॉकडाउन प्रभाव में आया. 3 मई को जिस दिन लॉकडाउन का दूसरा चरण समाप्त हुआ, उस दिन कोरोना मामलों की संख्या 39,980 तक पहुंच गई. अगले दो दिनों में इसमें 6,700 से अधिक मामले जुड़ गए. इसका मतलब है कि भारत में लॉकडाउन के दौरान हर दिन औसतन 1,099 नए कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं. नए मामलों में औसत वृद्धि 11.3 प्रतिशत रही. 1 मई से भारत में हर दिन 2,000 से अधिक नये मामले सामने आए हैं. 19 से 30 अप्रैल के बीच हर दिन नये मामलों की संख्या लगातार 1,000 से 2,000 के बीच रही.

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लॉकडाउन के दूसरे चरण (15 अप्रैल-3 मई) में हर दिन औसतन 1,574 नए मामले सामने आए, जबकि लॉकडाउन के पहले चरण (25