दिल्ली हिंसा: किसी ने गंवाई आंखें तो किसी को गंवाने पड़े हाथ

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नयी दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली के शिव विहार में रहने वाले मोहम्मद वकील की उनके घर के नीचे ही परचून की दुकान थी। इस दुकान से रोजाना होने वाली लगभग 200 से 300 रुपये की आमदनी से उनके सात सदस्यीय परिवार का गुजारा आराम से चल रहा था। लेकिन पिछले वर्ष इन्हीं दिनों राजधानी के इस इलाके में हुए सांप्रदायिक दंगों ने उनकी जिंदगी की गाड़ी को पटरी से उतार दिया। दंगे के दौरान फेंकी गई एक तेजाब की बोतल की चपेट में आने से उनकी आंखें चली गईं और वह अब परिवार के भरण पोषण की बात तो दूर अपनी नियमित दिनचर्या के लिए भी दूसरों के मोहताज हैं। वकील (52), शिव विहार फेज-छह की गली नंबर 13 में बीते तीस साल से रह रहे हैं।

पिछले साल 23 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच मौजपुर इलाके में हुई झड़प के बाद तकरीबन पूरे जिले में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित शिव विहार रहा था। वकील ने पीटीआई-से कहा, ‘‘उस दिन (25 फरवरी को) मैं अपने घर की छत पर था, जब अचानक किसी ने तेजाब से भरी बोतल फेंकी। मेरे चेहरे के पास यह बोतल फटी और मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया।’’ वह बताते हैं, ‘‘पास में मौजूद मेरी बेटी के भी चेहरे और गर्दन पर भी तेजाब के छींटे पड़े और वह भी कराह उठी।‘‘ वकील ने बताया,‘‘हमारी गली में 25 फरवरी को दिनभर तनाव था।

परिवार के सारे सदस्य घर में ही थे। शाम तक दंगाई भीड़ उग्र हो गई। हमने घर के दरवाजे बंद कर लिए। मैं बाहर का जायजा लेने छत पर गया था और नीचे देख ही रहा था तभी किसी ने मुझे निशाना बनाते हुए कांच की बोतल फेंकी जिसमें तेजाब भरा हुआ था। वकील ने बताया कि तेजाब की वजह से उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है। उन्होंने कहा, ‘‘अभी इलाज चल रहा है और डाक्टरों ने भरोसा दिया है कि आंखें इतनी ठीक हो जाएंगी कि मैं बिना किसी सहारे के चल-फिर सकूं।’’

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