जातीय जनगणना से इनकार पर बिहार में तीखी प्रतिक्रिया

जातीय जनगणना से इनकार: के मुद्दे पर केंद्र सरकार (Modi Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया है कि प्रशासनिक नजरिए से पिछड़े वर्गों की जाति आधारित जनगणना काफी कठिन और दुष्कर काम है। यह हलफनामा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव की ओर से दायर किया गया है। इस हलफनामे से साफ हो गया है कि देश में जातीय जनगणना (Bharat Me Jatiya Janganana) नहीं होगी।

Socio Economic and Caste Census जातीय जनगणना से इनकार पर बिहार में तीखी प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार की ओर से जातीय जनगणना पर अपना रुख स्पष्ट किए जाने के बाद सबसे तीखी प्रतिक्रिया बिहार (Bihar) में हुई है। हाल में बिहार के

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की अगुवाई में 10 दलों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मुलाकात की थी
  • देश में जातीय जनगणना (Jatiya Janganana) कराने की मांग की थी।

प्रधानमंत्री ने बिहार के प्रतिनिधिमंडल को इस मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया था। मगर अब केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर दिया है। केंद्र सरकार के इस रुख से बिहार में काफी नाराजगी दिख रही है।

Socio Economic and Caste Census जातीय जनगणना से इनकार : विरोध करने वालों का सामाजिक बहिष्कार हो

राजद (RJD) के मुखिया लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) काफी दिनों से जातीय जनगणना की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के रुख पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पता नहीं भाजपा और संघ के लोगों को पिछड़ों और अति पिछड़ों से इतनी नफरत क्यों है। जातीय जनगणना का विरोध करने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना से पिछड़ों की वास्तविक संख्या के साथ ही उनकी स्थिति का भी पता चलेगा।

लालू ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि देश में हाथी-घोड़ा, तोता-मैना, सांप-बिच्छू और कुत्ता-बिल्ली सबकी गणना की जा सकती है, मगर पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों से जुड़े लोगों की गिनती नहीं की जाएगी। उन्होंने भाजपा और संघ परिवार पर पिछड़ों के साथ धोखा करने का बड़ा आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार जनगणना के फार्म में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़कर पिछड़ों और अति पिछड़ों की गणना नहीं करा सकती तो ऐसी सरकार और इन वर्गों से जुड़े हुए सांसदों को धिक्कार है।

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