बाबुल सुप्रियो ने क्यों छोड़ी राजनीति? बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने दिया जवाब

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    वाराणसी। बाबुल सुप्रियो के राजनीति से इस्तीफा देने के पीछे सांसदों की बीजेपी से नाराजगी के सवाल के जवाब में रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि यह नाराजगी की वजह से नहीं है. उन्होंने कहा कि बाबुल सुप्रियो एक कलाकार हैं. वह राजनीति में आए, लेकिन राजनीति उनको रास नहीं आई और वह वापस चले गए. यह अपनी इच्छा के ऊपर है. इसपर राजनीतिक टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है. पश्चिम बंगाल में जिस तरह से सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाया गया तो क्या आप भी यूपी विधानसभा चुनाव में लड़ने के लिए तैयार हैं? इस सवाल के जवाब में रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि जब मैं विधायक और मंत्री थी तो मैं पार्टी के ही कहने पर सांसद के लिए लड़ी. इसलिए अगर पार्टी कहती है तो ग्राम प्रधानी तक लड़ सकती हूं. यह पार्टी का निर्णय होता है. भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता, पार्टी के कहे अनुसार ही चलते हैं.
    मॉनसून सत्र के मात्र 18 घंटे चलने के सवाल के जवाब में रीता बहुगुणा जोशी ने बताया कि विपक्ष ने नकारात्मक रवैया अख्तियार किया हुआ है. लोकतंत्र में और संसदीय इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि नए मंत्रियों का परिचय ना हुआ हो. कभी ऐसा नहीं हुआ कि शोक का प्रस्ताव पढ़ा जा रहा हो तो शोर हो रहा हो. कभी ऐसा नहीं हुआ कि 50 घंटे में सिर्फ 10 घंटे ही राज्यसभा चल पाई हो. कमोबेश यही हालत लोकसभा का भी है. विपक्ष मुद्दाहीन है.
    महिला शिक्षकों द्वारा 3 दिनों के पीरियड लीव की मांग के सवाल के जवाब में रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि सरकार ने प्रसूति में दिए गए 13-14 सप्ताह के वक्त को 26 सप्ताह की छुट्टी में बदल दिया. मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है. क्योंकि इससे बच्चों के ठीक से लालन-पालन करने में मदद मिलेगी. जो भी मांगें आती हैं, उन मांगों को जिस तरह से यह सरकार संवेदनशीलता के साथ पूर्ण करती है, मुझे नहीं लगता कि इससे पहले की किसी और सरकार ने ऐसा किया हो. पीरियड लीव की मांग आने दीजिए उस पर चर्चा होगी और विचार भी होगा.
    विभिन्न पार्टियों द्वारा ब्राह्मण वोट के लिए किए जाने वाले सम्मेलनों के सवाल के जवाब में रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि जो लोग हताश हैं वह जातीय समीकरणों पर भरोसा करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन ब्राह्मण सबसे सजीव और चिंतक व्यक्ति है. वह जानता है कि देश की प्रगति के लिए विकास के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है. 2014 के बाद से सारे समीकरण टूटते गए हैं. जितनी बार इन्होंने समीकरण बनाये इसका कोई असर नहीं हुआ और इस बार भी हम बड़ी बहुमत के साथ जीतेंगे.

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