वर्ल्ड फर्स्ट एड-डे पर छात्रों को दिया सीपीआर का ज्ञान

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Faridabad/Atulya Loktantra : विश्व प्राथमिक उपचार दिवस – वर्ल्ड फर्स्ट एड डे जोकि वैश्विक कार्यक्रम है सितंबर माह के दूसरे शनिवार को आयोजित किया जाता है, जिसे सन 2000 से प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। प्रति वर्ष की भांति इस साल भी फर्स्ट ऐड डे का थीम निर्धारित है, जो की सड़क के आस-पास के सुरक्षा मुद्दों को स्वीकार करते हुए दिया गया है – ” प्राथमिक चिकित्सा और सड़क सुरक्षा “।

जूनियर रेडक्रास और सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड के तत्वाधान में राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सराय ख्वाजा में सी पी आर – कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन अर्थात हृदय दबाव द्वारा पुनर्जीवन का प्रशिक्षण विद्यालय प्रभारी रविन्द्र कुमार मनचन्दा द्वारा आयोजित किया गया। उन्होंने प्रशिक्षुओं को बताया कि यातायात दुर्घटनाओं से हर 30 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत होती है। इनमे प्राथमिक उपचार न मिल पाने के कारण दुर्घटनाग्रस्त मौतों की मात्रा 50 प्रतिशत से ज्यादा होती हैं।

इस समस्या से निजात पाने का सबसे कारगर उपाय है कि लोगों को प्राथमिक सहायता के लिए जागरूक किया जाये क्योंकि इस नुकसान में से अधिकांश को रोका जा सकता है। प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी दुर्घटनाओं और मामूली या गंभीर चोट के मामलों में रोकथाम पर नागरिकों को शिक्षित करता है, और आपात स्थिति को हल करने के लिए कौशल देता है। दुनिया में होने वाली मौतों में सड़क दुर्घटना नौवां प्रमुख कारण है। हर वर्ष 13.4 लाख लोग दुनिया की सड़क है दुर्घटनाओं में प्राथमिक उपचार के अभाव में मारे जाते हैं। इनमें ज्यादातर मौतें ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से होती हैं। घर और गाड़ी में अपने साथ हमेशा प्राथमिक उपचार किट रखें। डूबने, जलने, हृदयघात, सड़क दुर्घटना और आत्मघात में प्राथमिक उपचार से जान बचाई जा सकती है। घायल इंसान को तुरंत उपचार मिलना चाहिए।

प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण लेने के बाद ही दिया जा सकता है, आज जे आर सी व एस जे ए बी प्रभारी रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने सी पी आर समझाते हुए कहा कि पीड़ित रोगी को एक समतल जगह पर पीठ के बल लिटा दें, व्यक्ति के कन्धों के पास घुटनों के बल बैठ जाएं, अपनी एक हाथ की हथेली को व्यक्ति की छाती के बीच में रखें। दूसरे हाथ की हथेली को पहले हाथ की हथेली के ऊपर रखें। अपनी कोहनी को सीधा रखें और कन्धों को रोगी की छाती के ऊपर सिधाई में रखें। अपने ऊपर के शरीर के वजन का इस्तेमाल करते हुए व्यक्ति की छाती को कम से कम 2 इंच (5 सेंटीमीटर) और ज़्यादा से ज़्यादा 2.5 इंच (6 सेंटीमीटर) तक दबाएं और छोड़ें। एक मिनट में 100 से 120 बार ऐसा करें। अगर आपको सीपीआर देना नहीं आता है, तो व्यक्ति के हिलने डुलने तक या मदद आने तक उसकी छाती दबाते रहें।

अगर आपको सीपीआर देना आता है और आपने 30 बार व्यक्ति की छाती को दबाया है, तो उसकी ठोड़ी को उठाएं जिससे उसका सिर पीछे की ओर झुकेगा और उसकी श्वसन नली खुलेगी। चिकित्सक के आने तक या रोगी के चिकित्सालय पहुंचने तक यह प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। प्रशिक्षुओं ने प्राथमिक चिकित्सा पर स्लोगन लिख और पोस्टर बना कर फर्स्ट ऐड़ की महत्ता को दर्शाया। अंग्रेजी प्रवक्ता रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बच्चों को बताए कि फर्स्ट ऐड़ प्रैक्टिकल ज्ञान है तभी तो कहा जाता है कि” प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान – बचाए बेशकीमती जान”।

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