UP Election 2022 Survey: खामोश वोटर, कुल 187 में भाजपा को 79 से 85 सीटें, सपा को 89 से 90 सीटें तय, बसपा-कांग्रेस होंगी सीगिंल डिजिट

UP Election 2022 Survey: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विधानसभा चुनावों की तारीख़ अभी नहीं आयी है। पर सूबे में चुनावी संग्राम देखा जा सकता है। इस चुनावी संग्राम के बीच न्यूज़ ट्रैक/ अपना भारत ने मतदाताओं का मूड भाँपने के लिए जो कोशिश की उसके नतीजे एक दम चौंकाने वाले हैं। राजनेता चाहे जितने ताने बाने बुन रहे हों पर जनता मुँह खोलने को तैयार नहीं है। हमने सूबे में चौदह हज़ार लोगों से बात की। बुंदेलखंड, रूहेलखंड, ब्रज, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध, पूर्वांचल- काशी व गोरखपुर मंडल इलाक़े के दो-दो हजार लोगों से रायशुमारी की है। पर कुल 403 सीटों में से केवल 178 सीटों के नतीजों तक पहुँचने में कामयाब हो पाये। इसके मुताबिक़ भाजपा की श्योर शॉट सीटों की संख्या केवल 79-85 हो सकती है। जबकि सपा को 89 से 90 सीटें मिलना तय है। बसपा व कांग्रेस (BSP and Congress) सीगिंल डिजिट पार्टीं होगी। आप पार्टी का खाता खुल जाने के बाबत मतदाता आश्वस्त करते दिखे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी का प्रदर्शन बेमिसाल होने की उम्मीद की जा सकती है। पर उनके हाथ कितनी सीटें लगेंगीं यह किसके साथ गठबंधन करेंगे इस पर निर्भर करेगा। हालाँकि जनता के लिहाज़ से जयंत चौधरी (Jayant Choudhary) व अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का गठबंधन तय है। ओम प्रकाश (Om Prakash) राजभर सात सीटें पाते हुए दिख रहे हैं। ओबैसी का खाता खुलता नहीं दिख रहा है। जबकि निषाद पार्टी अपने विधायक सदन में भेजने में कामयाब होगी। गठबंधन के लिहाज़ से देखें को जनता की राय में अखिलेश यादव बढ़त पर हैं। भाजपा राज्य में सत्ता विरोधी रुझान की गंभीर शिकार है। जनता को यह भी भरोसा है कि चाहे जिसकी भी गलती से हो, चुनाव बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक अंत तक हो ही जायेंगे।

लोकसभा चुनाव में भाजपा के वोट दस फ़ीसदी तक बढ़े (Lok Sabha Election BJP Seats)

अभी राज्य में त्रिशंकु विधान सभा के आसार हैं। हालाँकि तक़रीबन 180 सीटें हैं, जिनके सही नतीजे उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद घोषित हो पायेंगे। इस बार कम वोट पड़ने की उम्मीद है। सूबे की तस्वीर इसलिए भी साफ़ तौर पर नहीं उभर रही है क्यों कि शिवपाल सिंह यादव , जयंत चौधरी, औबैसी आदि के मूव भी चुनावी नतीजों पर असर डालेंगे। ये पत्ते अभी बंद हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा (BJP ki seat) की कुल सीटें घटीं पर वोट 7.35 फ़ीसदी बढ़ा । इसलिए सत्ता विरोधी रुझान का क्या असर पड़ेगा यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा (BJP) को 39.67 फ़ीसदी वोट मिला। जबकि बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा के वोट दस फ़ीसदी तक बढ़ गये। न्यूज़ ट्रैक/ अपना भारत का सर्वे चौदह अक्टूबर,2021 से दो नवंबर, 2021 के बीच किया गया।

  • भाजपा की श्योर शाट -79/85
  • सपाकी श्योर शॉट- 89/90
  • बसपा की श्योर शॉट- 3/5
  • कांग्रेस की श्योर शॉट- 2/4
  • आप की श्योर शॉट- 0/1
  • अपनादल की श्योर शॉट-5/7
  • भासपा की श्योर शॉट- 7/9

टिकट और चुनावी रणनीति

इस बार टिकट व चुनावी रणनीति पर काफ़ी सीटें निर्भर करेगी। इस मामले में भाजपा की बढ़त साफ़ देखी जा सकती है। यादव व मुसलमान सपा को वोट करते दिखेंगे। जबकि क्षत्रिय मुख्यमंत्री योगी के साथ मज़बूती से खड़ा है। जाटव अभी भी मायावती का साथ छोड़ने को तैयार नहीं है। पासी, बाल्मीकी व धोबी भाजपा के साथ रहेगा। ब्राह्मण उदासीन है। विकल्प तलाश रहा है। यदि अच्छा विकल्प नहीं मिला तो वह मन मारकर मोदी को वोट देगा। इस बार ओबीसी वोटों में व्यापक पैमाने पर बँटवारा देखने को मिलेगा । पश्चिम में जाट जयंत के साथ होगा। गुर्जर भी भाजपा से बिदक रहा है।

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