126 साल की उम्र में पद्मश्री अवार्ड, जानें शिवानंद बाबा खुद को कैसे रखते हैं फिट

काशी के दुर्गाकुंड इलाके में रहने वाले 126 साल के स्वामी शिवानंद बाबा को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया हैं। प्रभासाक्षी की टीम ने बाबा से बातचीत कर उनके सेहत का राज जाना और लोगो के लिए उनका संदेश पूछा।

बाबा का जन्म बांग्लादेश के श्रीहट्ट में 08.08.1896 को एक भिखारी परिवार में हुआ था। छः वर्ष की उम्र में गरीबी के चलते माता पिता ने बंगाल के नवदीप में एक गुरु के यहां छोड़ दिया। 1903 में बाबा जब बांग्लादेश पहुंचे तो पता चला कि भूख से बहन और माता पिता की मौत हो चुकी हैं। 1907 में अपने गुरु ओमकारा नंद गोस्वामी से दीक्षा मिला। गुरु के मौत के बाद बाबा 1977 में वृंदावन आ गये। 1979 में बाबा काशी आकर बस गये। भिक्षु परिवार से होने की वजह से बाबा ने बचपन से ही फल और दूध त्याग दिया था। वो दान लेना और मिठाई खाना भी पसंद नही करते।

भोर में उठना और योगा बाबा के सेहत का राज बना 

बाबा बताते हैं कि बचपन से ही मैं भोर में तीन बजे उठ जाता हूं। नित्य क्रिया कर पानी पीकर 45 मिनट योग करता हूं। छत से 16 से 18 सीढ़िया रोज उतरा चढ़ता हूं और साथ ही 3 से 4 किमी रोज टहलता हूं। आठ बजे तक सो जाता हूं।

जिंदगी में कभी नही खाया ऑयली फूड

बाबा ने बताता गरीबी बहुत नजदीक से देखा हूं। खाने में उबला चावल, दो रोटी, ब्वॉयल हरी सब्जियां खाते हैं। खाने में कोई भी तेल घी का इस्तेमाल नही करते। कभी ओवर डाइट नही लेता। पानी करीब रोज 4 से 5 लीटर बाबा पीते हैं। बाबा बताते हैं कि वो कभी बीमार नही पड़े हैं। कृष्ण मंत्र, शिव मंत्र, गीता पढ़ना उनको अच्छा लगता हैं। बाबा ने देश विदेश ( आस्ट्रेलिया, अमेरिका, जर्मनी, हंगरी ) की कई यात्राएं भी की हैं। कभी स्कूल नही गये लेकिन उनको हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला अच्छे से आता हैं। बाबा के फॉलोवर दिल्ली, कोलकाता, मुंबई समेत विदेशों में भी हैं। गरीबों को भोजन कराने में उनको बहुत आनंद आता हैं। बाबा ने बताया भारत कुछ बड़े हॉस्पिटल के डॉक्टर उनपर रिसर्च और मेडीकल टेस्ट भी कर चुके हैं। उन्होंने बताया इस बार शायद वो वोट न दे पाये, क्योंकि वृंदावन में भक्तों के साथ उनका कुछ कार्यक्रम हैं। PM मोदी उनको बहुत पसंद हैं। उन्होंने योग को एक नई पहचान दी हैं। उनका संदेश यही है कि लोग जीने की पद्धति बदले और जंक फूड से बचे। योग करे और ऑयली फूड न खाए।

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