Metaverse In Hindi: इन्टरनेट हुआ पुराना, अब सिर पर चढ़ा मेटावर्स का जादू

Metaverse In Hindi: टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक शब्द की बहुत चर्चा है – मेटावर्स (Metaverse) की। इसका असर इतना ज्यादा है कि फेसबुक (facebook) ने तो अपना नाम ही बदलकर ‘मेटा’ (Meta) रख लिया है। दुनिया भर की टेक कम्पनियाँ अब मेटावर्स में ही भविष्य खोज रही हैं। इसे भविष्य का इंटरनेट कहा जा रहा है जिसमें वर्चुअल रिएलिटी और अन्य तकनीकों का मिक्सचर होगा। एक अनुमान है कि अगले चार साल में यानी 2025 तक मेटावर्स 82 अरब डालर का बिजनेस हो जायेगा, जिसमें गेमिंग (metaverse game), बिजनेस, कम्युनिकेशन और एडवरटाइजिंग शामिल है।

क्या है मेटावर्स (Metaverse kya hai)?

मेटावर्स को कुछ इस तरह से समझिए कि इंटरनेट जिंदा हो जाए तो क्या होगा? यानी जो कुछ भी वर्चुअल वर्ल्ड में स्क्रीन के पीछे हो रहा है, वह एकदम आपके इर्द गिर्द होने लगे। यानी आप स्क्रीन को देखेंगे नहीं, उसके भीतर प्रवेश कर जाएंगे। इस रूप में देखा जाए तो कल्पना की कोई सीमा नहीं है। मिसाल के तौर पर अभी आप वीडियो कॉल करते हैं तो सामने वाले को देखते हैं । लेकिन मेटावर्स में आप वीडियो कॉल के अंदर होंगे। यानी आप सिर्फ एक दूसरे को देखेंगे नहीं, उसके घर, दफ्तर या जहां कहीं भी हैं, वहां आभासी रूप में मौजूद होंगे। ऑनलाइन होने वाली हर गतिविधि को आप इसी संदर्भ में देख सकते हैं।

सो तैयार हो जाइए इन्टरनेट के अगले लेवल के लिए। यह वो लेवल है जो दुनिया को पूरी तरह वर्चुअल या आभासी बना देगा। ये है मेटावर्स की दुनिया। दुनिया की टॉप सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने तो अपना नाम ही ‘मेटा’ कर दिया है। अब उसकी प्लानिंग एक अरब लोगों को बहुत जल्दी मेटावर्स में पहुंचा देने की है। इस काम में सिर्फ इसी साल में दस अरब डालर खर्च कर दिए जायेंगे। सिर्फ फेसबुक ही नहीं, अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल वगैरह सभी कंपनियों ने दुनिया को मेटावार्स में पहुँचाने की तैयारी कर ली है। बहुत जल्द यह सब होने जा रहा है।

मेटावर्स को एक उदाहरण से ज़रा यूं समझिये – पहले आप लोगों से फोन पर बात करते तो उनको देख नहीं पाते थे, अब विडियो कॉल होती है । लेकिन मेटावर्स की दुनिया में आप किसी को कॉल करके जब बात करेंगे तो लगेगा मानो वो इंसान आपके बगल में बैठा है। यानी पूरी तरह वर्चुअल। आप ऑफिस की ज़ूम मीटिंग करेंगे तो लगेगा आप एक दूसरे को छू सकते हैं। ये होगी मेटावर्स की दुनिया। सवाल है कि मेटावर्स ही नाम क्यों? तो जान लीजिये कि मेटा एक ग्रीक शब्द है जिसका मतलब होता है बियॉन्ड यानी ‘आगे’ और वर्स है यूनिवर्स यानी ब्रम्हांड, तो मेटावर्स हुआ इस यूनिवर्स यानी ब्रम्हांड से आगे की बात।

दरअसल, दुनिया कुछ हद तक मेटावर्स को फिलहाल बस छू भर रही है। इसकी एक अवांछित वजह है , कोरोना महामारी। महामारी के दौरान जीवन का बहुत कुछ मजबूरन डिजिटल हो गया है। सोशलाईजिंग से लेकर शॉपिंग और मीटिंग तक सब कुछ डिजिटल हो चुका है। मेटावर्स की बात तो पिछले कुछ सालों से चल रही थी । लेकिन 2021 में लोग इसके बारे में गंभीरता से बात करना शुरू किया है शायद ये कोई इत्तेफाक नहीं है क्योंकि कोरोना की वजह से इन बातों में तेजी आई है । लेकिन अभी हम जितना डिजिटल हुए हैं , वो मेटावर्स का तिनका भर नहीं है। क्योंकि मेटावर्स वास्तविकता या असली दुनिया में ऊपर, नीचे, चारों ओर तैरती सच्चाई की एक डिजिटल परत है। यह असली दिखती है ।लेकिन असली नहीं होती है।

एक कल्पना कीजिये कि आप सड़क पर जा रहे हैं और आपको कोई प्रोडक्ट याद आता है। तुरंत ही सड़क के किनारे एक वेंडिंग मशीन प्रगट हो जाती है, जिसमें वो सब प्रोडक्ट भरे पड़े हैं , जिनके बारे में आप सोच रहे थे। आप रुक कर अपना आइटम चुनते हैं। ये सब वर्चुअल हो रहा है। इसके बाद वो आइटम आपके घर पहुंचा दिया जाता है।

Leave a Comment