Report: देश के 60 फीसदी बच्चे नहीं कर पा रहे ऑनलाइन क्लास, 38 प्रतिशत बच्चों ने छोड़ा स्कूल

भारत में आए दिन आप टेलिकॉम कंपनियों की ओर से 4जी और 5जी सेवाओं को लेकर नए-नए दावे देखते-सुनते रहते हैं। खैर, दावे अपनी जगह हम खुद कॉल ड्रॉप की समस्याओं से दो-चार होते रहते हैं। कोरोना महामारी के दौरान जब देश के लोग घरों में बंद थे, तब इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ती चली गई। जब स्कूल करीब देश साल तक लंबे समय के लिए बंद हुए तो वर्चुअल कक्षाएं लगने लगीं। अब ऑनलाइन क्लास के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

लेकिन, इसी बीच आई एक रिपोर्ट ने इस व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। यह रिपोर्ट अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से पेश किया गया है। फाउंडेशन की स्टडी में दावा किया गया है, कि भारत में करीब 60 फीसदी से अधिक बच्चे इंटरनेट का प्रयोग नहीं कर पा रहे। इस रिपोर्ट के आने के बाद स्कूली शिक्षा की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों को बड़ा झटका लगा है।

मोबाइल डेटा का भारी भरकम खर्च भी परेशानी का सबब

उल्लेखनीय है, कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की तरफ से किए इस स्टडी में पाया गया है कि 60 फीसदी स्कूली बच्चे वर्चुअल क्लासेज को सिर्फ इसलिए नहीं देख पा रहे, क्योंकि उनके पास इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं है। एक अन्य स्टडी में सामने आया है, कि शहरी इलाकों के स्कूलों में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चों के अभिभावकों ने इंटरनेट सिग्नल और स्पीड जुड़ी शिकायतें की हैं। जब शहरी लोगों की इंटरनेट स्पीड को लेकर इतनी शिकायतें हैं तो आप खुद ही सोच सकते हैं कि ग्रामीण इलाकों की क्या हालात रह रही है। इसके अलावा, मोबाइल डेटा का भारी भरकम खर्च भी अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

मात्र 20 फीसद बच्चों तक ही ऑनलाइन क्लास की पहुंच

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि मात्र 20 फीसदी बच्चे ही ऐसे हैं, जो कोविड- 19 महामारी के दौर में भी पूरी तरह से ऑनलाइन क्लास कर पा रहे हैं। जबकि, इनमें से भी सिर्फ आधे बच्चे ही लाइव क्लास (Live Class) से जुड़ पा रहे हैं।

38 प्रतिशत बच्चों ने छोड़ा स्कूल

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि इंटरनेट समस्या के कारण कोरोना महामारी के दौर में करीब 38 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। इस सर्वे में कहा गया, कि 38 फीसदी अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन क्लास सही तरीका नहीं है। इसमें बच्चे उस तरह से पढ़ और समझ नहीं पा रहे, जैसा कि स्कूली कक्षाओं में होता है।

Leave a Comment