बवाल पर उठ रहे सवाल, क्या राजनीतिक दल युवाओं को बना रहे ढाल?

अग्निपथ योजना को लेकर आग कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस योजना के खिलाफ उत्तर प्रदेश और बिहार के युवा सबसे ज्यादा गुस्से में दिखाई दे रहे हैं। युवा सड़कों पर हैं और आज चौथे दिन भी अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन जारी है। आज बिहार में मुख्य विपक्षी दल राजद ने बंद बुलाया है जिसे नीतीश सरकार में सहयोगी जीतन राम मांझी का समर्थन प्राप्त है। पप्पू यादव और उनकी पार्टी लगातार अग्नीपथ योजना के खिलाफ सड़कों पर है। बिहार में भाजपा नेताओं के घरों को निशाना बनाया जा रहा है। यही कारण है कि आप सवाल सबसे ज्यादा उठने लगे हैं कि क्या राजनीति के लिए युवाओं को आगे किया जा रहा है? भाजपा ने तो पहले ही कह दिया है कि बिहार में जिस तरीके का प्रदर्शन हुआ है। वह आरजेडी के गुंडे कर रहे हैं। हालांकि कुल मिलाकर देखें तो आज भी बिहार के साथ-साथ देश के कई और हिस्सों में अग्नीपथ योजना को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है।

आज सुबह सवेरे ही बिहार के जहानाबाद में प्रदर्शनकारियों ने ट्रक और बस में आग लगा दी। इसके अलावा पथराव भी किया है। बिहार के 15 जिलों में इंटरनेट सेवा 19 जून तक सस्पेंड कर दी गई है। राजधानी पटना के साथ-साथ बिहार के कई जिलों में सुरक्षा आज बढ़ा दी गई हैं। हालांकि पिछले दो दिनों में कहीं न कहीं बिहार में पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठे हैं जिसमें पुलिस प्रशासन मौन होकर प्रदर्शन में हो रही हिंसा को देखता रहा। सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक इसको लेकर एक भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। जबकि राज्य में हिंसा और बवाल अपने चरम पर है। योगी आदित्यनाथ हो या शिवराज सिंह चौहान हो या फिर मनोहर लाल खट्टर, सभी ने कहीं ना कहीं शांति की अपील की है और युवाओं से भरोसा रखने को कहा है। लेकिन नीतीश कुमार ने चुप्पी साध रखी है।

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में भी अग्निपथ भर्ती योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। जौनपुर में प्रदर्शनकारियों ने एक बस में आग लगा दी। हालांकि, उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस एक्शन में है। अब तक 260 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि छह एफआईआर दर्ज भी की गई है। उत्तर प्रदेश के चंदौली में आज भी प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए हैं। हरियाणा के भी कई जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। लेकिन जिस तरीके से बिहार और दूसरे राज्यों में ट्रेनों में आग लगाई गई, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, इसके बाद से यह सवाल उठा रहा है कि क्या ऐसे लोग सेना में जाएंगे? इस देश में विरोध प्रदर्शन करने का हक सभी को हैं लेकिन इस तरह से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का अधिकार कानून किसी को नहीं देता। सवाल पूछे जा रही है कि इस युवाओं को भड़का कर राजनीतिक दल अपनी रोटियां क्यों सेक रहे हैं?

इस विरोध प्रदर्शन पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि कई जगह से लूटपाट की घटना की खबर आई है। वहीं कई जगह युवाओं के हाथ में डंडे और लोहे की रॉड हैं। सवाल यह है कि आंदोलन में डंडे और लोहे की रॉड का क्या काम? इन सबके बीच आज गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने अग्निवीरों के लिए CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती के लिए 10% रिक्तियों को आरक्षित करने का निर्णय लिया, दो बलों में भर्ती के लिए अग्निवीरों को ऊपरी आयु सीमा से 3 वर्ष की छूट दी गई। अग्निवीर के पहले बैच के लिए आयु में अधिकतम आयु सीमा से 5 वर्ष की छूट होगी।

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