किसान आंदोलन को लेकर भिड़े पंजाब-हरियाणा, कैप्टन के बयान पर पड़ोसी राज्य की तीखी प्रतिक्रिया

Kisan Andolan: केंद्र सरकार (Modi Government) की ओर से पारित तीन नए कृषि कानूनों (New Farm laws) के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन (Kisan Andolan) को लेकर पंजाब और हरियाणा सरकार (Punjab vs Haryana Government) के बीच ठन गई है। दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) की ओर से किसान आंदोलन (Farmers Protest) को लेकर दिए गए एक बयान पर विवाद पैदा हो गया है।

कैप्टन ने कहा है कि नए कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले किसानों को दिल्ली और हरियाणा में जाकर धरना देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के विभिन्न स्थानों पर चल रहा किसानों का धरना (Kisano Ka Dharna) तत्काल खत्म किया जाना चाहिए क्योंकि इसका पंजाब की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है।

कैप्टन के इस बयान पर हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। हरियाणा सरकार के कृषि मंत्री और गृह मंत्री ने इस बयान को लेकर कैप्टन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पद पर बैठे हुए व्यक्ति को इस तरह का गैर जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैप्टन के बयान से साफ हो गया है कि कांग्रेस की ओर से ही किसानों को भड़काया गया है ताकि भाजपा सरकार (BJP Government) के लिए मुश्किलें खड़ी की जा सके।

पंजाब में धरना खत्म करें किसान

कैप्टन ने अपने बयान में कहा कि पंजाब में करीब 113 जगहों पर किसानों का धरना चल रहा है, मगर किसानों को अब यह धरना खत्म करके हरियाणा और दिल्ली की सीमाओं पर अपना आंदोलन चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों के आंदोलन के चलते प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इससे साफ है कि आगे चलकर किसानों का धरना पंजाब के लिए गंभीर साबित हो सकता है।

कैप्टन ने कहा कि पंजाब में अपनी मांगों को लेकर धरना देने वाले किसानों को पंजाब के बारे में जरूर सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति पहले ही ठीक नहीं चल रही है। यदि किसानों का आंदोलन राज्य में इसी तरह जारी रहा तो भविष्य में स्थितियां और चिंताजनक हो सकती हैं। कैप्टन ने कहा कि किसानों को भी राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए काम करना चाहिए।

दिल्ली और हरियाणा में धरना देने की अपील

होशियारपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में धरना (Punjab Mein Dharna) देने से किसान संगठनों को कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों ने हमेशा राज्य की तरक्की में योगदान दिया है। उन्हें आगे भी इसी तरह की भावना बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि पंजाब के किसानों ने राज्य के लिए संकटपूर्ण स्थिति पैदा करने की प्रवृत्ति नहीं छोड़ी तो फिर पंजाब के भविष्य के बारे में क्या सोचा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि किसान नेताओं और संगठन को इस बात को जरूर सोचना चाहिए कि पंजाब की धरती उन सभी की है। यहां विभिन्न स्थानों पर चल रहा किसान आंदोलन अभी तक काफी नुकसानदेह साबित हुआ है। किसान आंदोलन के कारण पंजाब में विकास की तेज रफ्तार काफी प्रभावित हुई है । राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी इसका काफी बुरा असर पड़ा है। किसानों को हरियाणा और दिल्ली में धरना देकर कृषि कानूनों को वापस लेने का दबाव बनाना चाहिए। पंजाब में धरना देने से किसान संगठनों को कुछ भी हासिल नहीं होगा।

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