खेती किसानी में प्राइवेट सेक्टर की एंट्री, 10 कंपनियों से हुए हैं एमओयू

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    नई दिल्ली : एग्रीकल्चर सेक्टर (Agriculture Sector) में अब प्राइवेट कंपनियों की एंट्री हो गयी है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय (kendriya krishi mantralaya) ने किसानों के कल्याण के लिए अब तक दस प्राइवेट कंपनियों (private companies) से हाथ मिलाया है। ये कम्पनियाँ किसानों को परामर्श से लेकर उपज की बिक्री तक में मदद करेंगी। भारत में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक बनाने, उपज बढ़ाने और उपज की सही मार्केटिंग के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है । जिसका अल्टीमेट उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना (kisano ki aamdani badhana) है।

    केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने लेटेस्ट राउंड में जिन कंपनियों के साथ एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर किये हैं । उनमें सिस्को, निन्जाकार्ट, जियो प्लेटफार्म्स, आईटीसी लिमिटेड और एनसीडीईएक्स ई मार्केट लिमिटेड शामिल हैं। इसके पहले माइक्रोसॉफ्ट, स्टार एग्रीबाजार, एसरी इंडिया टेक्नोलॉजी, पतंजलि और अमेज़न के साथ एमओयू किये जा चुके हैं।

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    कौन कंपनी क्या करेगी

    जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (Jio Platforms Limited): ये कंपनी महाराष्ट्र के जालना और नासिक जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट चलायेगी जिसके तहत किसानों को परामर्श दिया जाएगा।

    आईटीसी लिमिटेड (ITC Limited): कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में बरसों से लगी इस दिग्गज कंपनी ने क्षेत्र विशेष पर आधारित फसल परामर्श सेवा देने के लिए एमओयू किया है। आईटीसी अपनी सेवा को मध्य प्रदेश के सीहोर और विदिशा जिलों में प्रस्तुत करेगी। खासतौर पर गेहूं की खेती को सपोर्ट किया जाएगा।

    सिस्को (Cisco): आईटी नेटवर्किंग के क्षेत्र की मल्टीनेशनल कंपनी सिस्को किसानों, प्रशासन, शिक्षाविदों और उद्योग के बीच जानकारी के प्रभावी आदान-प्रदान में विशिष्ट कार्य करेगी। सिस्को का पायलट प्रोजेक्ट हरियाणा के कैथल और मध्य प्रदेश के मोरेना जिलों में चलाया जाएगा।

    एनसीडीईएक्स ई मार्केट्स लिमिटेड (NCDEX E Markets Limited) : यह भारत की अग्रणी स्पॉट एक्सचेंज कंपनी है। यह एलआईसी, नाबार्ड, इफ्को, पीएनबी, कनारा बैंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की मेजोरिटी शेयर होल्डिंग वाली एनसीडीईएक्स की सब्सिडियरी है। एनसीडीईएक्स कृषि उपज का सबसे बड़ा एक्सचेंज है। कृषि मंत्रालय के साथ एमओयू के तहत यह कंपनी बाजार, डेटा और वित्तीय एकीकरण के लिए काम करेगी। इसका प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के गुंटूर, कर्नाटक के देवनगेरे और महाराष्ट्र के नासिक जिलों में चलेगा।

    निन्जाकार्ट (ninjakart) : यह कंपनी खेतों से बाजार तक ताजे उत्पाद लाने का काम करती है। कंपनी के अनुसार यह एक सप्लाई चेन कंपनी है । खुदरा व्यापारियों को सीधे किसानों की उपज 12 घंटे के भीतर पहुंचा देती है। 6 युवा उद्यमियों का यह स्टार्टअप बंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, दिल्ली, अहमदाबाद, पुणे और मुम्बई में काम कर रहा है। मंत्रालय के साथ हुए करार के तहत निन्जाकार्ट एग्रीकल्चरल मार्केटप्लेस प्लेटफार्म यानी मंडी को डेवलप करके संचालित करेगा , जहाँ पर कृषि उपज से जुड़े सभी सम्बंधित पक्ष जुड़ेंगे। कंपनी अपना पायलट प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के छिन्दवाड़ा और इंदौर तथा , गुजरात के आनंद जिलों में क्रियान्वित करेगी।

    कृषी मंत्रालय का कहना है कि जिन कंपनियों से एमओयू किये गए हैं वो सभी कम्पनियाँ अपने कांसेप्ट को लागू करके दिखाएंगी। इन प्रोजेक्ट्स के चलते किसानों को यह निर्णय लेने में सहूलियत होगी कि वे क्या फसल उगायें। किस किस्म के बीज इस्तेमाल करें। अधिकतम उपज पाने के लिए क्या क्या करें।

    डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन

    दरअसल, कृषि मंत्रालय ने 2021 से 2025 तक के लिए एक डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (Digital Agriculture Mission) शुरू किया है , जिसके तहत ये एमओयू किये गए हैं। इस मिशन के तहत आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के इस्तेमाल के अलावा ड्रोन और रोबोट की मदद भी कृषि कार्यों में लिया जाना है। कृषि मंत्रालय का कहना है कि डिजिटाईजेशन की जरूरत और महत्त्व को महसूस करते हुए किसानों का एक डेटाबेस बनाया जा रहा है ताकि कृषि का एक डिजिटल इकोसिस्टम बन सके। इस डेटाबेस को किसानों की जमीनों के रिकार्ड से लिंक किया जाएगा। किसानों को एक आईडी प्रूफ उपलब्ध कराया जाएगा। डेटा बेस में किसानों के काम की सभी जानकारियां उपलब्ध होंगी। अभी तक साढ़े पाँच करोड़ किसानों के विवरण डेटाबेस में जमा किये जा चुके हैं।

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