ऑक्सीजन लीक : 2 घंटे बंद रही ऑक्सीजन सप्लाई, आंखों के सामने तड़पकर दम तोड़ते रहे मरीज

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    नासिक के जाकिर हुसैन अस्पताल में बुधवार दोपहर ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से 22 मरीजों की जान चली गई। कई की हालत अभी भी नाजुक है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑक्सीजन टैंकर में लीक की गड़बड़ी सुधारने के लिए 30 मिनट सप्लाई रोकी गई थी, लेकिन परिजनों का कहना है कि सप्लाई 30 मिनट नहीं, बल्कि 2 घंटे तक बंद थी। एक परिजन ने कहा कि मेरी बहू ने आंखों के सामने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया, लेकिन अस्पताल वालों ने कुछ नहीं किया। पढ़िए लापरवाही के इस लीकेज की आंखों देखी…

    हादसे में जान गंवाने वाले एक

    व्यक्ति ने बताया कि हमने हमारे परिवार का सदस्य खो दिया। कौन जवाबदेही लेगा इसकी? दोपहर 12:30 बजे के करीब अचानक ऑक्सीजन आनी बंद हो गई और मेरा भाई तड़प-तड़पकर मर गया। उसे 10 दिन पहले भर्ती किया गया था। 2 घंटे तक ऑक्सीजन बंद रही। ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था। अगर सिलेंडर होता तो भी मेरे भाई की जान बच सकती थी।

    कुछ परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के पास कल रात से ही ऑक्सीजन की कमी थी। जब आज ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई, तब भी हमने ही ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्टाफ को बताया। उन्होंने हमें ही नीचे चेक करने के लिए भेज दिया। नीचे आए तो डॉक्टरों ने हमें दोबारा ऊपर भेज दिया। पूरे अस्पताल में हम भटकते रहे।

    इस घटना में एक म

    हिला की भी मौत हुई है। उसके ससुर ने बताया कि 4 दिन पहले अस्पताल लेकर आए थे। हालत में लगातार सुधार हो रहा था, लेकिन ऑक्सीजन सप्लाई रुकते ही तबीयत खराब होने लगी और उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि मैंने उसे अपनी आंखों के सामने तड़पता हुआ देखा। मैं इधर-उधर भाग रहा था, लेकिन कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। हॉस्पिटल प्रशासन भी कोई जवाब नहीं दे पाया।

    स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 11 महिलाओं और 11 पुरुषों की जान हादसे में गई है। सभी कोरोना मरीज थे। इस घटना की जांच शुरू हो गई है। इसके लिए आईएएस अधिकारी, इंजीनियर, एक सीनियर डॉक्टर की टीम को जिम्मा सौंपा गया है। जो कंपनी यहां ऑक्सीजन भरने का काम करती है, वह जापान की एक मल्टीनेशनल कंपनी है और कई साल से ऑक्सीजन सप्लाई कर रही थी।

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