New Delhi: LIC आईपीओ की फाइल बढ़ी आगे, 10 मर्चेंट बैंकरों की हुई नियुक्ति

भारतीय अर्थव्यवस्था का पटरी पर लाने की कवायद में जुटी भारत सरकार ने हाल हीं में कई सरकारी उपक्रम के स्टेक को बेचने का फैसला किया था, जिसके बाद विपक्ष के तमाम नेता चाहे वो कांग्रेस के हों या टीएमसी या फिर किसी अन्य दल के सभी ने एक स्वर में इस फैसले पर अपना विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस नेता व सांसद राहुल गांधी व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार के विनिवेश की नीति को प्रेस कांफ्रेस कर इसके लूप होल को बड़े बारीकी से बताया व सरकार के इस फैसले को अव्यवहारिक कदम बताया। उन्होंने आगे कहा कि जो संपत्ति कांग्रेस ने सत्तर वर्षों में अर्जित की थी उसके ये औने-पौने दामों में बेच रह हैं। आपको बता दें कि सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के भी शेयर को बेचने का फैसला किया था जिसकी प्रक्रिया चालू हो गई है।

केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के पब्लिक ऑफर (LIC IPO) के प्रबंधन के लिए 10 मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति कर दी है। इनमें गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया और नोमुरा फाइनेंशियल एडवाइजरी एंड सिक्योरिटीज इंडिया शामिल हैं। डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्‍टमेंट एंड पब्लिक असेट्स मैनेजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, इस आईपीओ के प्रबंधन के लिए चुने गए बैंकरों में एसबीआई कैपिटल मार्केट, जेएम फाइनेंशियल, एक्सिस कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज, जेपी मॉर्गन इंडिया, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड भी हैं।

मर्चेंट बैंकरों की नियुक्ति के लिए 15 जुलाई 2021 को आवेदन मांगे थे

दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने ट्वीट किया कि केंद्र ने एलआईसी आईपीओ के लिए बुक रनिंग लीड मैनेजर्स के साथ दूसरे कई सलाहकारों का भी चयन कर लिया है। बता दें कि विनिवेश विभाग ने मर्चेंट बैंकरों की नियुक्ति के लिए 15 जुलाई 2021 को आवेदन मांगे थे। इसके बाद 16 मर्चेंट बैंकरों ने देश के सबसे बड़े आईपीओ के प्रबंधन में रुचि दिखाई थी। दीपम हिस्सेदारी बिक्री के लिए कानूनी सलाहकार की नियुक्ति की भी प्रक्रिया में है। इसके लिए बोली भेजने की अंतिम तिथि 16 सितंबर 2021 है। कंपनी का आईपीओ जनवरी-मार्च 2022 तिमाही में आने की उम्मीद है।

विनिवेश विभाग ने बताया कि बीमा कंपनी मिलीमैन एडवाइजर्स एलएलपी की नियुक्ति आईपीओ से पहले एलआईसी का बिल्‍ट-इन प्राइस निकालने के लिए की गई है। माना जा रहा है कि कुछ महीने के अंतराल पर यह इश्यू दो किस्तों में आ सकता है। वहीं, पब्लिक ऑफर से पहले ही विदेशी संस्‍थागत निवेशकों को 20 फीसदी तक के निवेश की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, केंद्र वित्‍त वर्ष 2021-22 में ही एलआईसी को सूचीबद्ध (LIC Listing) कराने की योजना पर काम कर रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल एलआईसी में हिस्सेदारी बेचने के लिए मंजूरी दे चुका है। केंद्र को उम्मीद है कि एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी बेचकर वह 80,000-90,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है।

बिजनेस का करीब 60 फीसदी हिस्‍सा सूचीबद्ध कंपनियों के पास होगा

सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का आईपीओ आने के बाद देश में इंश्योरेंस बिजनेस का करीब 60 फीसदी हिस्‍सा सूचीबद्ध कंपनियों के पास होगा। बता दें कि मार्च 2022 तक सरकार को विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने हैं। इसी योजना के तहत सरकार एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी घटा रही है। एलआईसी देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है। इसके पास करीब 34 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। इसकी सहयोगी कंपनी सिंगापुर में है, जबकि बहरीन, केन्या, श्रीलंका, नेपाल, सऊदी अरब और बांग्लादेश में इसके ज्वाइंट वेंचर हैं।

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