ग्लेशियर टूटने से अलर्ट पर UP, बनारस-बलिया तक ऐसे हो रही गंगा के जलस्तर की निगरानी

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    Uttar Pardesh/Atulya Loktantra News : उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में रविवार को नंदादेवी ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने से धौली गंगा नदी में बाढ़ आ गई और पारिस्थितिकी रूप से नाजुक हिमालय के हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई. इससे निचले इलाके होकर गुजरने वाली नदियों में पानी बढ़ने की आशंका है. लिहाजा, यूपी सरकार ने उन सभी जिलों को अलर्ट कर दिया जहां से गंगा नदी गुजरती है. प्रशासन को नदी के जल स्तर पर निगरानी का आदेश दिया गया है.

    ग्लेशियर टूटने से अलकनंदा नदी में बाढ़ आ गई. इससे ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और तपोवन में एनटीपीसी का प्रोजेक्ट तहस-नहस हो गया. इस तबाही में कई लोगों की जान चली गई तो संपत्ति का भी काफी नुकसान हुआ है.

    उत्तर प्रदेश के जिला अधिकारियों को रविवार को एक आपदा अलर्ट जारी किया गया. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक राहत आयुक्त ने बताया, ‘चमोली में ग्लेशियर टूटने से नदी में जल स्तर बढ़ने की आशंका है, लिहाजा यूपी में गंगा किनारे बसे जिलों को हाई अलर्ट पर रहने की आवश्यकता है. इन जिलों को 24 घंटे स्थिति पर निगरानी रखने को कहा गया है.’

    जारी बयान में राहत आयुक्त ने कहा, ‘अगर जरूरत हुई तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा. NDRF, SDRF और PAC फ्लड कंपनी को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है.’

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में उत्पन्न हुई इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए यूपी सरकार हर संभव सहायता मुहैया कराएगी. उत्तराखंड में बांध टूटने से उत्पन्न हुई परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने, SDRF को राहत कार्यों के लिए तत्पर रहने को कहा है.

    सतर्क रहने का सीएम का आदेश
    सीएम योगी ने कहा कि गंगा नदी के किनारे स्थित सभी जिलों के DM, एसएसपी और एसपी को भी पूरी तरह सतर्क रहने के लिए निर्देश दिया गया है. देवभूमि उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से उत्पन्न हुई आपदा में अनेक नागरिकों के काल कवलित होने की सूचना से मन दुखी है.

    बाद में जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्तर में बढ़ोतरी होने पर गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को अन्यत्र शिफ्ट किया जाना चाहिए. उन्होंने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की. सीएम ने कहा, “लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए और नदी के किनारों की ओर नहीं जाना चाहिए. किसी भी विपरीत परिस्थितियों में, जिला प्रशासन के साथ सहयोग करें. यूपी सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है,”

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में गंगा लगभग 1,000 किलोमीटर के दायरे में फैली है. हम पूरी सावधानी बरत रहे हैं. उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग को घटना के तुरंत बाद सतर्क कर दिया गया था. गृह विभाग स्थिति को मॉनिटर कर रहा है. हालांकि अलकनंदा में पानी का स्तर भी काफी तेजी से घट रहा है.

    कन्नौज में हुई आपात बैठक
    कन्नौज में जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्रा ने अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई. गंगा के किनारे बसे गांवों के गोताखोरों और राजस्व अधिकारियों को अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया है. जिलाधिकारी ने जिले में महादेवी घाट का निरीक्षण किया और कहा कि जल स्तर में वृद्धि के मामले में, ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाएगा.

    बलिया में भी जिला प्रशासन अलर्ट
    जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही के अनुसार बलिया में भी जिला प्रशासन ने लोगों को अलर्ट रहने को कहा है. सिंचाई विभाग अलर्ट पर है. हालांकि गंगा खतरे के निशान से लगभग पांच मीटर नीचे बह रही है.

    कल्पवासियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा
    शाहजहांपुर में, “कल्पवास” (नदी के किनारे माघ के महीने में रहने वाले भक्त) लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है, जबकि अन्य को सतर्क रहने के लिए कहा गया है. जिला मजिस्ट्रेट इंद्र कुमार सिंह ने कहा, “माघ के महीने के दौरान गंगा नदी के तट पर लगभग एक महीने तक ‘कल्पवासियों’ का प्रवास होता है, वे स्नान करते हैं और पूजा अर्चना करते हैं. लगभग 100 ‘कल्पवासियों’ को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है.” पुलिस अधीक्षक एस आनंद ने कहा कि उन्होंने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा है.

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