ग्वालियर के राजघराने से ताल्लुक रखते हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया, जानें कैसे ली राजनीति में एंट्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की कैबिनेट विस्तार में बुधवार को 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इस लिस्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का नाम भी शामिल रहा । उन्होंने बुधवार शाम राष्ट्रपति भवन (rashtrapati bhavan) में नागरिक उड्डयन मंत्री पद के लिए शपथ ली । ख़ास बात ये रही कि 30 साल पहले उनके पिता ने भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभाला था ।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को बॉम्बे में माधवराव सिंधिया और माधवी राजे सिंधिया के घर हुआ। कहा जाता है कि राजनीति में पढ़े- लिखे लोगों की कमी है । लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया पढ़े-लिखे युवा नेता की छवि में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनकी शिक्षा कैंपियन स्कूल, मुंबई और द दून स्कूल, देहरादून में हुई। उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज , दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है । बाद में उन्होंने हार्वर्ड कॉलेज, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के स्नातक उदार कला महाविद्यालय में स्थानांतरित कर दिया, जहां उन्होंने 1993 में अर्थशास्त्र में बीए की डिग्री के साथ स्नातक किया। वो यही नहीं रुके साल 2001 में, उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन प्राप्त की ।

आपको बता दें, ज्योतिरादित्य सिंधिया ना केवल मंत्री हैं बल्कि एक ग्वालियर रियासत के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के पोते हैं। पिता माधवराव सिंधिया 26वें संशोधन के रूप में ग्वालियर के महाराजा बने थे। दूसरी तरफ उनकी माता जी माधवी राजे सिंधिया (किरण राज्य लक्ष्मी देवी), नेपाल के प्रधान मंत्री, कास्की और लामजंग के महाराजा, गोरखा के रामकृष्ण कुंवर के पितृवंशीय वंशज, जुडा शमशेर जंग बहादुर राणा की परपोती थीं। उनकी दादी विजयराजे सिंधिया, भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से थीं ।

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