गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स से पीछे हटीं भारत-चीन सेनाएं

16वीं कोर कमांडर बैठक में बनी थी सहमति, 2020 में हुई झड़प के बाद बढ़ा था गतिरोध

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं तनाव वाले इलाके से पीछे हट गई हैं। दोनों देशों के अधिकारियों ने बताया कि गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र में गश्त चौकी-15 से भारत और चीन की सेनाएं वापस लौटी हैं। दोनों देशों की ओर से वर्तमान स्थिति की समीक्षा भी कर ली है। इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को भारतीय सेना प्रमुख मनोज पांडेय ने कहा था कि अभी गश्त चौकी-15 से सैनिकों की वापसी की समीक्षा की जानी बाकी है।

कोर कमांडर बैठक में बनी थी सहमति
यह प्रक्रिया 8 सितंबर को कोर कमांडर स्तर के 16वें दौर के दौरान दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा के बाद शुरू हुई थी। इस दौरान दोनों देश गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र से सेनाओं की वापसी पर सहमत हुए थे। इसके साथ ही डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में गतिरोध को हल करने की कोशिश जारी है, लेकिन अभी तक कोई प्रगति देखने को नहीं मिल रही है।

शंघाई सहयोग संगठन से पहले बड़ा कदम
सीमा पर शांति के लिए यह एक अच्छा कदम है। दोनों देशों की सेनाएं ऐसे समय पीछे हटीं है, जब दो दिन बाद 13 सितंबर को उज्बेकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन का सालाना शिखर सम्मेलन होना है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल होंगे।

मई 2020 में जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध बढ़ा था तब से भारत-चीन के सैनिकों को पैट्रोलिंग पॉइंट 15 के पास एक दूसरे के विपरीत तैनात किया गया है। भारत और चीन ने पैंगोंग त्सो लेक के दोनों किनारों से सैनिकों को हटा भी चुके हैं।

गलवान में 15 जून 2020 की रात हुई थी हिंसक झड़प
इस दिन गलवान में हमारे ग्राउंड ट्रूप्स पर दबाव था, चीन पर भी दबाव था। चीन की सेना उस साइट पर बैठी हुई थी तो भारतीय सेना ने उनसे वापस जाने को कहा। हालांकि वो लोग मान गए, पर विवाद शुरू हुआ चीनी हरकत से। चीन ने दो टेंट लगाए, जो ऑब्जर्वेशन पोस्ट की तरह थे। चीनी सैनिकों ने तर्क दिया कि अगर हम वापस चले गए तो आपकी गतिविधियों पर नजर नहीं रख पाएंगे।

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