ऑक्सीजन जरूरत से ज्यादा: फिर समस्या कहां, क्यों मर रहे मरीज

    5

    नई दिल्ली: देश में ऑक्सीजन (Oxygen) के लिए त्राहि त्राहि मची है। कोविड अस्पताल (Covid Hospitals) से गैर कोविड अस्पताल तक ऑक्सीजन के बगैर ठप होते जा रहे हैं। ऑक्सीजन के गहराते संकट को सुप्रीम कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय इमरजेंसी करार देते हुए किसी भी तरह से ऑक्सीजन की सप्लाई (Oxygen Supply) करने को कहा है। असल सवाल यह है कि क्या देश में आक्सीजन की कमी है। जिसके चलते तमाम सरकारें अब ऑक्सीजन प्लांट (Oxygen Plant) लगाने की तैयारी कर रही हैं। तो ऐसे में कब ऑक्सीजन उत्पादन होगा और कब मरीजों तक पहुंचेगी। और तब तक क्या मरीज अस्पतालों में और अस्पतालों के बाहर दम तोड़ते रहेंगे।

    वाणिज्य विभाग के ऑक्सीजन निर्यात (Oxygen Export) के आंकड़ों से पता चलता है कि देश ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 10 महीनों के दौरान दुनिया को दोगुना ऑक्सीजन निर्यात किया। भारत ने अप्रैल 2020 और जनवरी 2021 के बीच दुनियाभर में 9,301 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया था। इसकी तुलना में, देश ने वित्त वर्ष 2015 में केवल 4,502 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया था। आपूर्ति की गई ऑक्सीजन तरल रूप में थी और इसका उपयोग औद्योगिक और चिकित्सीय उपयोग दोनों के लिए किया जा सकता है।

    समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) बिगड़ते हालात के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं यदि समय रहते सरकार चेत जाती तो आज ऑक्सीजन की इतनी गंभीर समस्या नहीं होती। सरकार द्वारा समय पर तैयारी न करने का खमियाजा आज देश भुगत रहा है। विशेषज्ञों की चेतावनी के बावजूद सरकार का इस बीमारी से निपटने में लचर रवैया रहा।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की मांग में पांच गुना उछाल देखा गया। ऐसे में विपक्ष के नेता भारत के वित्तीय वर्ष 2021 में ऑक्सीजन निर्यात के लिए सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं, जबकि तथ्य यह है कि देश प्रति दिन 7,000 मीट्रिक टन से अधिक तरल ऑक्सीजन का उत्पादन करता है जो कि मांग से वर्तमान में भी कहीं अधिक है। यह दर्शाता है कि समस्या कहीं और है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here