एकनाथ शिंदे लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ, मंत्रिमंडल से बाहर रहेंगे देवेंद्र फडणवीस

मुंबई। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा-शिवसेना और 16 निर्दलियों ने राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश किया है। इसके लिए राज्यपाल को विधायकों के समर्थन वाला पत्र दिया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पॉवर के पीछे नहीं है, हम मुख्यमंत्री बनने के लिए इनके साथ नहीं जा रहे हैं, हम हिंदुत्व के मुद्दे की वजह से उनके साथ जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा ने निर्णय किया है कि एकनाथ शिंदे को हम समर्थन देंगे।

देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि एकनाथ शिंदे शाम 7 बजकर 30 मिनट पर शपथ लेंगे और आने वाले दिनों में हम मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और मैं मंत्रिमंडल के बाहर रहूंगा।

2019 में भाजपा और शिवसेना साथ में चुनाव लड़ी। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमें पूर्ण बहुमत मिला। भाजपा को 106 और शिवसेना को 56 सीटें मिलीं। इसके साथ ही कई अन्य लोग हमारे साथ आए थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने चुनाव के दरमियान मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम का ऐलान भी किया था। सभी को यह मंजूर था। किंतु चुनाव के बाद शिवसेना के नेताओं ने यह निर्णय किया कि हिंदू उदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे जी ने जिन विचारों का जीवनभर विरोध किया, जीवनभर जिनसे लड़ाई की और जिनके लिए वो कहते थे कि अगर इनके साथ जाना पड़ा तो मेरी दुकान बंद कर दूंगा, ऐसे लोगों के साथ गठबंधन किया और उसके बाद ढ़ाई साल तक हमने एक सरकार देखी। जिसमें न कोई तत्व थे, न कोई विचार थे, न कोई गति थी, न कोई प्रगति थी।

उन्होंने कहा कि जो सरकार चालू इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट बंद कर रही थी, जो सरकार लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों से लिप्त थी, जिस सरकार के दो मंत्री धनशोधन मामले में जेल में गए, दाऊद के साथ रिश्ते के आरोप मंत्री पर लगे, जेल में जाने के बावजूद मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाया नहीं गया तो एक प्रकार से पथभ्रष्ट, ऐसी सरकार जिसका भाजपा ने लगातार विरोध किया, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार चली। जिसको लेकर शिवसेना के विधायकों में भारी आक्रोश था।

फडणवीस ने बताया कि शिवसेवा विधायकों को लगता था कि वापस वोट मांगने जाना है और आज तक जो बातें कहीं उसके विरोध में काम हो रहा है। जिनके खिलाफ जिंदगीभर लड़े उनके साथ बैठे हैं, ऐसे में वोट कैसे मांगेंगे। साथ ही उनके विधानसभा में जो हारे उन्हें पैसा मिलता था। जिसको लेकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना विधायकों ने एक ही मांग की कि कांग्रेस-एनसीपी के साथ हम नहीं रह सकते, ऐसे में यह गठबंधन तोड़ा जाए। ऐसे में उनकी मांग पूरी नहीं हुई।

शिवसेना विधायकों ने नहीं की बगावत

उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व छोड़ दिया, विचारों को छोड़ दिया और अपने विधायकों से ज्यादा कांग्रेस और एनसीपी के विधायकों की बात दिल को लगाकर रखी और उन्हें ही महत्व दिया। जिसको लेकर विधायकों ने अपनी आवाज बुलंद की। इसे मैं बगावत नहीं कहूंगा। उन्होंने अपनी आवाज बुलंद करके इन विधायकों ने यह कहा कि आप बाहर निकलिए नहीं तो हम इनके साथ नहीं रहेंगे। ऐसे समय जब सरकार के पास बहुमत नहीं रहा और मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) ने इस्तीफा दिया तो हम लगातार पिछले ढ़ाई साल से कहते आए हैं कि यह अंतर्विरोध से बनी सरकार है और यह ज्यादा दिन नहीं चलेगी और हम फिर अल्टरनेट सरकार देंगे और महाराष्ट्र में चुनाव नहीं लादेंगे।

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