क्या सच में लालकिले पर किसानों ने फहराया खालिस्तानी झंडा, जाने खबर की पूरी सच्चाई

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File Photo

New Delhi/Atulya Loktantra: गणतंत्र दिवस के मौके राजधानी दिल्ली में उपद्रवी किसानों का हुड़दंग दिखा। जिसके चलते दिल्ली सहित हरियाणा के कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई। गणतंत्र दिवस के अवसर पर जहां एक तरफ जश्न मनाया जा रहा था तो वहीं दूसरी तरफ किसान कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर मार्च निकाल कर केंद्र सरकार को अपनी ताकत दिखा रहे थे। लेकिन बात तब बढ़ गयी जब कुछ किसानों उपद्रवी का रूप धारण कर लिया। किसान तय रूट और नियमों को तोड़ते हुए किसान दिल्ली के अंदर घुस गए। दिल्ली में बेकाबू किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पों की खबरें आने लगीं थीं। मगर हद तो तब हो गई जबकि ट्रैक्टरों पर सवार लोग लालकिला पहुंच गए और परिसर के अंदर घुसकर लाल किले की प्राचीर पर झंडा लगा दिया। लेकिन इसके पीछे की सच्चाई हम आपको इस पोस्ट की माध्यम से बता रहे है।

दिल्ली के अलग अलग इलाकों के होते हुए और पुलिसवालों को ट्रैक्टरों से रौंदने की कोशिश करते हुए प्रदर्शनकारी किसान लाल किले में घुस गए। राष्ट्रीय राजधानी स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक के कुछ गुंबदों पर झंडे लगा दिए। उपद्रवी उस ध्वज-स्तंभ पर अपना झंडा लगाते दिखे जहां से प्रधानमंत्री 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। उन्होंने लालकिले के कुछ गुंबदों पर भी अपने झंडे लगा दिए। इसके कुछ समय बाद ही सोशल मीडिया पर बहसें शुरू हो गईं। सोशल मीडिया पर लोग लाल किले की प्रचार पर किसानों द्वारा झंडा फहराने को लेकर अलग अलग बातें करने लग गए।

लालकिले पर खालिस्तानी झंडे की कहानी
सोशल मीडिया पर लोगों की तरफ से भारत के लिए इसे काला दिन बताते हुए दावा जाने लगा कि लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराया गया है। ऐसे में क्या वाकई लाल किले की प्राचीर पर, जहां हर साल स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं, वहां लोगों ने वहां तिरंगे को हटाकर खालिस्तानी झंडा लगाया तो इसका जवाब हम आपको दे देते हैं। कल भले ही गणतंत्र दिवस के मौके पर शर्मनाक घटना हुई, मगर लाल किला पर तिरंगे झंडे की जगह खालिस्तानी झंडे का दावा बिल्कुल ही गलत है।

उपद्रवी किसानों ने लाल किले की प्राचीर पर दूसरा झंडा जरूर लगाया था, मगर वह खालिस्तानी झंडा नहीं, बल्कि सिखों का धार्मिक झंडा निशान साहिब था। इसके अलावा यह दावा कि तिरंगे को वहां से हटाया गया, ये भी गलत है। न्यूज एजेंसी एएनआई का लाल किले की घटना पर वीडियो सामने आया था। जिसमें देखा जा रहा है कि एक व्यक्ति एक पोल पर चढ़कर झंडा फहराता दिखा। न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार इस फ्लैग पर घटना के वक्त तिरंगा झंडा नहीं था। वीडियो में वह व्यक्ति सिर्फ निशान साहिब का झंडा लगाते दिखा। उपद्रवियों ने निशान साहिब का झंडा फहराया था।

‘खंडा’ का अर्थ
आपको बता दें कि सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहिब में प्रतीक चिन्ह के रूप में ‘खंडा’ (दोधारी तलवार) और एक चक्र होता है। सिख धर्म में यह प्रतीक चिन्ह गुरु गोबिंद सिंह के समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। जबकि खालिस्तानी झंडे पर प्रतीक चिन्ह के रूप में ‘खंडा’ के साथ ‘खालिस्तान’ लिखा होता है। हालांकि खालिस्तान के समर्थक जो झंडा इस्तेमाल करते हैं, उसमें ‘खंडा’ हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है।

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