पीएम मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक आज, तीनों कृषि कानून होंगे रद्द

Delhi: तीनों कृषि कानून वापसी (withdrawal of agriculture laws) की घोषणा के बाद आज राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक (union cabinet meeting)। बैठक (union cabinet meeting) सुबह 11 बजे। बड़ा फैसला। सबसे अहम जिस पर सभी की निगाहें। कृषि कानून को रद्द (withdrawal of agriculture laws) करने पर मुहर। कृषि कानून पर नए बिल को भी मंजूरी।

कैबिनेट से मुहर के बाद सरकार इसे वापस लेने के लिए संसद के पटल पर मानसून सत्र में रखेगी। इस बैठक पर किसान संगठनों से लेकर विपक्षी दलों और भाजपा के नेताओं तक की नजर टिकी है। क्योंकि किसान संगठन ने ऐलान किया है कि 24 को कैबिनेट बैठक (union cabinet meeting) के बाद वह अपनी अगली रणनीति का 27 नवंबर को खुलासा करेंगे।

पीएम मोदी ने वापस लेने की घोषणा की थी

गौरतलब है कि केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून (Three agriculture laws) को लेकर लंबे समय से दिल्ली और अलग-अलग जगहों पर किसानों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। विपक्षी दल भी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाजपा को घेरने में लगे हुए थे। जिसके बाद 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देश के नाम संबोधन में इसे वापस लेने की घोषणा की थी।

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने संबोधन में कहा था कि आज गुरु नानक देव की जयंती है इस मौके पर वह किसानों की जो शंकाएं हैं उसे दूर करने के लिए यह तीनों कानून वापस ले रहे हैं। इसके बाद आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक (union cabinet meeting) में इसके रद्द होने पर मुहर लग जाएगी। इसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र (winter session of parliament) में इसे पटल पर रखा जायेगा। पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने भाषण में कहा था कि वह तीनों कृषि कानून (Three agriculture laws) के फायदे कुछ किसानों को समझाने में नाकाम रहे। वह किसानों से माफी मांगते हुए इसे वापस लेने की घोषणा की थी।

कानून वापसी के बाद विपक्ष हमलावर

पीएम मोदी (PM Narendra Modi) की कृषि कानून वापसी (withdrawal of agriculture laws) की घोषणा के बाद किसान जहां जश्न मना रहे थे वहीं विपक्ष अपने काम में जुड़ गया। तमाम सियासी पार्टियों ने पीएम मोदी (PM Narendra Modi) और उनकी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देर से ही सही लेकिन सही फैसला उनको लेना पड़ा।

बता दें इस कानून के विरोध में किसान एक साल से आंदोलनरत हैं और विपक्ष भी इसमें खामी बताकर मोदी सरकार (Modi Government) को घेरने में लगा था। पांच राज्यों के चुनाव को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार (Modi Government) बैकफुट पर आई और इस कानून को उन्हें रद्द करना पड़ा। हालांकि कानून रद्द होने के बाद भी एक बड़ा धड़ा इस कानून के पक्ष में भी खड़ा हुआ दिखाई दे रहा है, जो इसके फायदे बता रहा है। लेकिन सियासी नुकसान को देखते हुए मोदी सरकार (Modi Government) जो अब तक कभी बैकफुट पर नहीं आई थी वह भी किसानों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर हो गई।

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