नाटक में चरित्र के लिए वेशभूषा है महत्वपूर्ण

Faridabad: हरियाणा कला परिषद के सहयोग से चल रही एक महीने की नाट्य कार्यशाला के प्रतिभागियों ने नाटक में वेशभूषा के महत्व के बारे में जाना। बैठानिया सेंटर में चल रही इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को नाटक से जुड़े अलग-अलग गुर सीखने का मौका मिल रहा है। नाटक करते हुए सीखने की प्रक्रिया के अंतर्गत रंगमंच के विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी जा रही है। यह जानकारी देने के लिए रंगमंच के विभिन्न विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में आज फैशन डिज़ाइनर अनमोल बारा ने प्रतिभागियों को नाटक तथा फिल्म में वेशभूषा के महत्व के बारे में समझाया।
अनमोल ने सबसे पहले वेशभूषा यानि काॅस्ट्यूम के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जहाँ कई तरह के कपड़े कई तरीकों से पहने जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्टाइल और फैशन फ्रेंच के शब्द हैं और भारतीय इतिहास में हड़प्पा, मोहन जोदड़ो में मिली कलाकृतियों से यह पता चलता है कि किस तरह के कपड़े पहने जाते थे। हम सभी जानते हैं कि इस दुनिया में हर इंसान बिना कपड़ों के ही आता है। इसके बाद शुरू होता है कपड़ों का सफ़र और फिर अलग-अलग रंगों, पैटर्न, डिज़ाइन, कपड़े की बात आती है।फिल्म और थियेटर में किसी भी चरित्र को निभाने के लिए काॅस्ट्यूम का विशेष महत्व है क्योंकि इंसान की वेशभूषा उसके चरित्र के बारे में बताती है। वेशभूषा समाज में व्यक्ति की छवि का निर्माण करती है और मंच पर तो यह और भी विशेष हो जाता है। उन्होंने बताया कि ख़ास तौर पर रंगमंच में किस तरह हम कम संसाधनों को प्रयोग करते हुए अपनी वेशभूषा को महत्वपूर्ण बना सकते हैं। इसके बाद सभी प्रतिभागियों ने दुपट्टों को अलग-अलग तरीकों से प्रयोग करके भी दिखाया।हरियाणा कला परिषद के सहयोग से हो रही इस कार्यशाला में करीब 20 प्रतिभागी रंगमंच में मेकअप, मास्क मेकिंग, संगीत की भूमिका, रंगमंचीय खेल एवं गतिविधियाँ तथा मंच पर नाटक करने के बारे में सीख रहे हैं। ग़ौरतलब है कि हरियाणा कला परिषद के तत्वावधान में आयोजित हो रही इस नाट्य कार्यशाला का आयोजन 2 अक्तूबर से किया जा रहा है और इसका समापन हरियाणा दिवस के अवसर पर 1 नवंबर को एक नाटक के साथ किया जाएगा।

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