कोरोना के बीच आया भारी संकट: अब शुरू हुआ ऑक्सीजन का रोना

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    नई दिल्ली: देश में एक बार फिर से कोरोना वायरस का कहर बढ़ रहा है। संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ने से भारत में कोविड-19 का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। कोरोना की रफ्तार को काबू में करने के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारें एहतियाती कदम उठा रही हैं। लेकिन देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेकाबू हो गई है।

    वहीं, राज्यों में वैक्सीन की कमी के बीच अब ऑक्सीजन की किल्लत भी सामने आ रही है। कई राज्यों में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच ऑक्सीजन की कमी हो गई है। आपको बता दें कि कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन संजीवनी का काम रही है। ऐसे में देश में ऑक्सीजन का संकट आने से गंभीर मरीजों को बचाना एक बड़ा टास्क बन गया है।

    आपको बता दें कि जिन राज्यों में ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होता है, वो ऑक्सीजन के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर हैं। दिल्ली और पंजाब में हरियाणा से ऑक्सीजन आता है। वहीं, राजस्थान इसके लिए उत्तराखंड पर निर्भर है। इसी तरह कर्नाटक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को ऑक्सीजन देता है। बताते चलें कि भारत में एक दिन की ऑक्सीजन की मांग दो हजार मीट्रिक टन है। जबकि उत्पादन क्षमता 6,400 मीट्रिक टन है।

    हालांकि ऑक्सीजन का उपयोग अन्य उद्योग भी करते हैं। रोजाना कोरोना के मामले बढ़ने से ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ रही है। इस बीच कई राज्यों को ऑक्सीजन की किल्लत से गुजरना पड़ रहा है।

    महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र के जन स्वास्थ्य विभाग ने बीते महीने ही ऑक्सीजन निर्माताओं को 80 फीसदी हिस्सा चिकित्सकीय उपयोग के लिए आपूर्ति करने का निर्देश दिया था। एक अधिकारी ने कहा कि राज्य में एक दिन की ऑक्सीजन की मांग 700 मीट्रिक टन हो गई है, जबकि महाराष्ट्र की उत्पादन क्षमता 1200 मीट्रिक टन से अधिक है।

    बता दें कि महाराष्ट्र में रोज 50 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। रोजाना बढ़ते कोरोना मरीजों की वजह से अस्पताल एक दम भरे पड़े हैं। मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर में तो बेड लगभग फुल हो चुके हैं। आईसीयू व वार्ड भरने के बाद अब ऑक्सीजन की भी कमी होने लगी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में आईसीयू बेड और ऑक्सीजन की काफी ज्यादा किल्लत हो गई है।

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