बैंक हड़तालः निजीकरण बना फसाद, आने वाले दिन होंगे बदतर, जानें पड़ेगा क्या असर

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    निजीकरण के खिलाफ बैंकों की हड़ताल का आज दूसरा दिन है। इस हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने किया था। जिसमें नौ बैंक यूनियनें हिस्सा ले रही हैं। हड़ताल में तकरीबन 10 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं। शनिवार- इतवार और सोम- मंगल लगातार चार दिन बैंक बंद रहने से ग्राहकों को जबर्दस्त परेशानी हुई और केवल यूपी में ही 30 हजार करोड़ का लेनदेन ठप रहा। देशव्यापी स्तर पर देखें तो इस हड़ताल से लाखों करोड़ का लेन देन ठप रहा है। हड़ताल में 45 ग्रामीण बैंकों के करीब एक लाख कर्मचारी भी शामिल हैं।

    बैंक कर्मियों की हड़ताल को समर्थन देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि भारत सरकार लाभ निजी हाथों में सौंप कर राष्ट्रीय हितों का नुकसान कर रही है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों को बेचना भारत की वित्तीय सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता करना है। मैं हड़ताली बैंक कर्मचारियों के साथ एकजुटता में खड़ा हूं।

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