नीलकंठ पर्वत पर खिलता है एक फूल, जिसकी शक्तियों के बारे में जानकर हो जाएंगे दंग

    0
    0

    लोग सबसे बड़े तीर्थ स्थल की बात करते हैं तो उसमें सबसे पहले बद्रीनाथ धाम आता है। बद्रीनाथ धाम देवी देवताओं की अलौकिक शक्तियों से बंधा है। बद्रीनाथ धाम हिमालय का वह क्षेत्र है जहां अलौकिक अविस्मरणीय अद्भुत शक्तियों से गुलजार है। इस बद्रीनाथ धाम की बर्फीली पहाड़ियों पर इन दिनों ब्रह्म कमल नीलकंठ की तलाश में खिला है।

    जिससे बद्रीनाथ धाम की सुंदरता में ब्रह्म कमल ने चार चांद लगा दिया है। भगवान नीलकंठ के दर्शन को पूरे देश और विदेश से हजारों हजार किलोमीटर की यात्रा कर दर्शनार्थी अपना मत्था टेकने पहुंचते हैं। यह यात्रा साहसिक पर्यटकों और आस्थावान तीर्थयात्रियों की पहली पसंद है। हालांकि वर्ष 2020 से कोरोना महामारी के चलते यहां पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही ठप है।

    50% for Advertising
    Ads Advertising with us AL News

    बर्फीली वादियों में नीलकंठ की शोभा बढ़ाने के लिए उगता है यह फूल

    बर्फ की चोटियों पर खिलने वाला ब्रह्म कमल फूलों का राजा कहलाता है। यह एक अलौकिक अद्भुत और दुर्लभ प्रजाति का पौधा है। यह मुख्य रूप से भारत की बर्फीली वादियों में नीलकंठ की सुंदरता को चार चांद लगाने के लिए ही उगता है। आपको बता दें कि यह फूल बेहद कम समय के लिए दिखता है। ब्रह्म कमल एक स्थानीय और दुर्लभ फूल वाले पौधे की प्रजाति है जो मुख्य रूप से भारतीय हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है। फूल को ‘हिमालयी फूलों के राजा’ के रूप में भी जाना जाता है। तारा की तरह चमकने वाला ब्रह्म कमल फूल खिलता है देखने में बहुत ही आकर्षक अद्भुत अकल्पनीय है।

    अलौकिक शक्तियों का वास है इस फूल में

    कलयुग में संजीवनी तो नहीं मिल सकती। लेकिन ब्रह्म कमल नामक फुल में अलौकिक शक्तियों का वास है। इस फुल में अद्भुत चमक है। ‘ब्रह्म कमल’ नामक फूल के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। इस फूल की खासियत जानकर तो आपको और भी अधिक हैरानी होगी। दरअसल, यह फूल किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं माना जाता। दरअसल इस पुष्प की मदद से ही कई प्रकार की औषधियां तैयार की जाती हैं। इस फूल की मदद से बहुत से लोगों का इलाज भी होता है।

    बर्फीली वादियों में केवल नीलकंठ पर्वत पर खिलता है यह फूल

    नीलकंठ पर्वत चमोली जिले के बदरीनाथ धाम से आठ किलोमीटर की चढ़ाई पार कर हिमालय की 6,596 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। नीलकंठ पर्वत को बदरीनाथ, केदारनाथ और सतोपंथ का बेस माना जाता है। नीलकंठ पर्वत ऋषिगंगा नदी का उद्गम स्थल है। यह स्थान 12 माह बर्फ से पटा रहता है। उच्च हिमालीय क्षेत्र होने के चलते यहां हिमालीय जड़ी-बूटियों का संसार मौजूद हैं। इन दिनों ग्लेशियरों के घटने के बाद यहां राज्य पुष्प ब्रहम कमल से नीलकंठ पर्वत की चोटी गुलजार हो गई है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नीलकंठ पर्वत को देवों के देव महादेव के प्रिय स्थलों में माना जाता है

    हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नीलकंठ पर्वत को देवों के देव महादेव के प्रिय स्थलों में एक माना जाता है। हिन्दू के साथ-साथ विदेशियों के लिए यह स्थान विशिष्ट महत्व रखता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार चांदनी रात में पर्वत पर भगवान की तपस्यारत आकृति भी नजर आती है। ब्रह्म कमल का उल्लेख वेदों में भी मिलता है। जैसा कि इसके नाम से ही विदित है। ब्रह्म कमल का नाम उत्पत्ति के देवता ब्रह्मा जी के नाम पर रखा गया है।

    इसे सौसूरिया अब्वेलेटा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बारहमासी पौधा है। यह ऊंचे चट्टानों और दुर्गम क्षेत्रों में उगता है। यह कश्मीर, मध्य नेपाल, उत्तराखंड में फूलों की घाटी, केदारनाथ शिवलिंग क्षेत्र आदि स्थानों में बहुतायत में होता है। यह 3,600 से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। पौधे की ऊंचाई 70-80 सेंटीमीटर होती है।

     

    50% for Advertising
    Ads Advertising with us AL News
    Previous newsअगले 3 दिन का मौसम का हाल, IMD ने जारी किया अलर्ट, जानें अपने राज्य का मौसम
    Next newsघटती जा रही जन्म दर, कोरोना ने स्थिति को और भी बिगाड़ा
    इस न्यूज़ पोर्टल अतुल्यलोकतंत्र न्यूज़ .कॉम का आरम्भ 2015 में हुआ था। इसके मुख्य संपादक पत्रकार दीपक शर्मा हैं ,उन्होंने अपने समाचार पत्र अतुल्यलोकतंत्र को भी 2016 फ़रवरी में आरम्भ किया था। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस नाम को मान्यता जनवरी 2016 में ही मिल गई थी । आज के वक्त की आवाज सोशल मीडिया के महत्व को समझते हुए ही ऑनलाईन न्यूज़ वेब चैनल/पोर्टल को उन्होंने आरंभ किया। दीपक कुमार शर्मा की शैक्षणिक योग्यता B. A,(राजनीति शास्त्र),MBA (मार्किटिंग), एवं वे मानव अधिकार (Human Rights) से भी स्नातकोत्तर हैं। दीपक शर्मा लेखन के क्षेत्र में कई वर्षों से सक्रिय हैं। लेखन के साथ साथ वे समाजसेवा व राजनीति में भी सक्रिय रहे। मौजूदा समय में वे सिर्फ पत्रकारिता व समाजसेवी के तौर पर कार्य कर रहे हैं। अतुल्यलोकतंत्र मीडिया का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सरोकारों से परिपूर्ण पत्रकारिता है व उस दिशा में यह मीडिया हाउस कार्य कर रहा है। वैसे भविष्य को लेकर अतुल्यलोकतंत्र की कई योजनाएं हैं।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here