फ्रेट रेलवे कॉरिडोर के जमीन अधिग्रहण में धांधली, खंगाला जा रहा एसडीएम कार्यालय का रिकार्ड

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मुंबई-दादरी फ्रेट रेलवे कॉरिडोर के लिए अधिगृहीत की गई जमीन में धांधली को लेकर मंगलवार को भी जांच जारी रही। जांच कमेटी में शामिल अधिकारियों ने अब उन गांवों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है, जिन गांवों का अभी अवार्ड घोषित नहीं किया गया है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि जांच के चलते चार गांवों का अवार्ड भी रोक दिया जाएगा। यूपी के दादरी से नवी मुंबई तक रेलवे फ्रेट कॉरिडोर बनाया जा रहा है।

इस कॉरिडोर मंद पलवल जिले के दस गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई है। पलवल के एसडीएम ने गांव असावटी, जटौला, मैदापुर और पृथला की अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित कर दिया है। इसके बाद करीब 500 लोगों ने 5 लाख रुपए या सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया है।

रेलवे अधिकारियों ने इतने ज्यादा लाभार्थी होने पर मामले की जांच शुरू की। मामले में एसडीएम कार्यालय के लैंड एक्विजिशन कलेक्टर (एलएसी) ब्रांच को 10 मार्च को सील कर दिया गया। इसके बाद 11 मार्च को एडीसी व सीईओ जिला परिषद के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित कर जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

धांधली: 78 गज जमीन के मिले 150 मालिक

जांच में पाया गया कि रेलवे द्वारा अधिगृहीत की गई मात्र 78 गज जमीन के 150 लोग मालिक बन रेलवे से मुआवजा व नौकरी मांग रहे हैं। इसी प्रकार अन्य लोग भी हैं जो इसी प्रकार जमीन की रजिस्ट्रियों में धांधली कर एक गज से भी कम जमीन के मालिक बन मुआवजा व नौकरी मांग रहे हैं। रेलवे की ओर से इसकी शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से की गई तो सीएम विजिलेंस की टीम ने एसडीएम कार्यालय को सील कर जांच शुरू कर दी।

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