… तो क्या हार रहा हैं भगवा

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Chhattisgarh/Atulya Loktantra : भाजपा शासित तीन राज्यों सहित कुल पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल के अनुमानों ने सियासी दलों की धडक़ने बढ़ा दी है। शुक्रवार (7 दिसंबर, 2018) शाम जारी एग्जिट पोल के मुताबिक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भगवा पार्टी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान है, जबकि राजस्थान में विपक्षी पार्टी (कांग्रेस) बहुमत हासिल कर सकती है।

एग्जिट पोल में यह भी अनुमान लगाया गया है कि तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सत्ता में कायम रहेगी। हालांकि, मिजोरम में त्रिशंकु विधानसभा बनने की संभावना है, जहां कांग्रेस सत्ता में है। इन सभी पांचों राज्यों में मतगणना 11 दिसंबर को होगी। वहीं छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव में एक्जिट पोल के नतीजे आने से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों उत्साहित हैं। राज्य में दोनों दलों ने जीत का दावा किया है। मगर छत्तीसगढ़ के एग्जिट बोल पर राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह पर खासा असर पड़ता मालूम नहीं पड़ रहा है। एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक मालूम पड़ा है कि सिंह ने हाल ही में छत्तीसगढ़ भवन में शांति से तीन दिन बिताए। इस दौरान कोई आधिकारिक काम नहीं किया। वह पत्नी, बेटा और बहू संग फिल्म देखने भी गए। यहां कुछ मंदिरों में भगवान के दर्शन किए।

जिसमें क्नॉट प्लेस का हनुमान मंदिर शामिल है। बता दें कि छत्तीसगढ़ एक्जिट पोल पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा विधायक और प्रदेश प्रवक्ता शिवरतन शर्मा ने कहा कि पिछले तीन चुनावों में हार चुकी कांग्रेस पार्टी के असफल और सर्वाधिक विवादास्पद अध्यक्ष का तमगा हासिल करने जा रहे भूपेश बघेल चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया सहित जनता को भी सशंकित नजरों से देखते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ही उल जलूल बयान देकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे भूपेश बघेल आज भी यह मानने को तैयार नही हैं कि कांग्रेस पार्टी को छत्तीसगढ़ में चौथी बार हार का सामना 11 दिसम्बर को करना पड़ेगा।

सभी राष्ट्रीय चैनलों में दिखाए गए एग्जिट पोल इसकी पुष्टि कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि जनता द्वारा नकार दिए गए भूपेश बघेल और उनकी पार्टी किसानों को भ्रम में रखकर सत्ता सुख हासिल करना चाहती थी। इसके लिए अनुचित और असंवैधानिक कदम उठाए जाने का संकेत देती रही, लेकिन छत्तीसगढ़ के अन्नदाता अपनी प्रबुद्ध जागरूकता का परिचय देते हुए इनके झांसे में नहीं आए और इन्हें सिरे से नकार दिया, परिणाम के संकेत यही स्पष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हार और हार की बौखलाहट को अनुचित आरोपों से नकारने का प्रयास कर रहे भूपेश बघेल 11 तारीख के बाद अपने होने वाले हश्र से चिंतित हैं।

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