पचास हजार से अधिक कर्मचारियों की बची नौकरी, SLP केस पर सुनवाई

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Chandigarh/Atulya Loktantra: हरियाणा के पचास हजार से अधिक कच्चे और पक्के कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय में हरियाणा सरकार की एसएलपी पर सुनवाई हुई। जस्टिस अरुण मिश्रा व जस्टिस विनीत सरन की खंडपीठ ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रतिवादी योगेश त्यागी व अंशुल वलेचा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ के निर्देश के बाद फिलहाल पचास हजार से अधिक कर्मचारियों की नौकरी बच गई है। हाईकोर्ट का निर्णय अभी लागू नहीं होगा। इसी 30 नवंबर को हाईकोर्ट का निर्णय आए छह महीने पूरे हो रहे थे। छह माह की अवधि के भीतर हाईकोर्ट के आदेशों पर स्टे या यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट से जरूरी थे।

इसलिए सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 31 मई 2018 को पूर्व हुड्डा सरकार की नियमितीकरण नीतियां रद्द करने के खिलाफ छह सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। सरकार पर 4654 पक्का हुए कर्मियों और पचास हजार कच्चे कर्मियों की नौकरी बचाने के लिए सर्व कर्मचारी संघ सहित कर्मचारी संगठनों ने दबाव बनाया हुआ था।

यह तात्कालिक राहत, सरकार निकाले स्थायी समाधान
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर फोगाट, महासचिव सुभाष लांबा व ऑडिटर सतीश सेठी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों को तात्कालिक राहत तो मिली है, लेकिन स्थायी समाधान तभी संभव होगा जब 10 अप्रैल 2006 को ऊमादेवी बनाम कर्नाटक सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार कानून बनाकर बदल नहीं देती।

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ विधायी शक्तियों का इस्तेमाल कर सरकार विधानसभा में रेगुलराइजेशन एक्ट बनाए और विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर ऊमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निरस्त कराकर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे। इससे प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित होगी।

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