50 हजार रुपये से कम भाव में सोना बेच रही है सरकार, कल से खरीदें

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New Delhi/Atulya Loktantra: अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं. लेकिन ज्वेलरी नहीं खरीदना चाहते हैं तो केंद्र सरकार की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश का सुनहरा मौका है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम एक बार फिर 28 दिसंबर से शुरू होने वाली है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की नौवीं सब्सक्रिप्शन
दरअसल वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की यह नौवीं सब्सक्रिप्शन सीरीज है. आप 28 दिसंबर से 01 जनवरी तक इस योजना में निवेश कर सकते हैं. इस योजना को ऑपरेट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा किया जाता है. आठवीं सीरीज के मुकाबले इस बार कम दाम में निवेश का मौका मिल रहा है. आठवीं सीरीज में सोने की इश्यू प्राइस 5177 रुपये प्रति ग्राम तय की गई थी. (Photo: File)

बॉन्ड की कीमत 5,000 रुपये प्रति ग्राम
रिजर्व बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस बार बॉन्ड की कीमत 5,000 रुपये प्रति ग्राम तय की गई है. हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों को बॉन्ड की तय कीमत पर प्रति ग्राम 50 रुपये की छूट दी जाएगी. यानी डिजिटल भुगतान करने पर एक ग्राम सोने के लिए 4950 रुपये पेमेंट करना होगा.

RBI तय करती है कीमत
बता दें, इस सरकारी गोल्‍ड बॉन्ड की कीमत बाजार में चल रहे सोने की रेट से कम होती है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना में गोल्‍ड की कीमत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से तय की जाती है. बॉन्ड के तौर पर आप सोने में न्यूनतम एक ग्राम और अधिकतम चार किलो तक निवेश कर सकते हैं. इसपर टैक्‍स भी छूट मिलती है. इसके अलावा स्‍कीम के जरिए बैंक से लोन भी लिया जा सकता है. (Photo: File)

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के फायदे
बॉन्‍ड पर सालाना कम से कम ढाई फीसदी का रिटर्न मिलेगा. गोल्ड बॉन्ड में किसी तरह की धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती है. ये बॉन्ड्स 8 साल के बाद मैच्योर होंगे. मतलब साफ है कि 8 साल के बाद भुनाकर इससे पैसा निकाला जा सकता है. यहीं नहीं, पांच साल के बाद इससे बाहर निकलने का विकल्प भी होता है.

कितना खरीद सकते हैं सोना
आरबीआई भारत सरकार की तरफ से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करता है. इस बॉन्ड में निवेश एक ग्राम के गुणकों में किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक व्यक्ति के लिए एक साल में 500 ग्राम है. वहीं हिन्दू संयुक्त परिवार एक साल के दौरान अधिकतम 4 किलोग्राम सोने की कीमत के बराबर तक का बॉन्ड खरीद सकते हैं. ट्रस्ट और वित्तीय वर्ष के समान इकाइयों के मामले में निवेश की ऊपरी सीमा 20 किलोग्राम है.

बॉन्‍ड खरीदने के फायदे
जैसे ही सोने की कीमतों में इजाफा होता है, वैसे ही गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को इसका फायदा मिलता है. ये बॉन्‍ड पेपर और इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्मेट में होते हैं. जिससे आपको फिजिकल गोल्‍ड की तरह लॉकर में रखने का खर्च भी नहीं उठाना पड़ता. इस गोल्‍ड की बिक्री बैंकों, डाकघरों, एनएसई और बीएसई के अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के जरिए होती है.

इसे खरीदने के लिए आपको अपने बैंक, बीएसई, एनएसई की वेबसाइट या डाकघर से संपर्क करना होगा. यहां से इसे डिजिटल तरीके से खरीदा जा सकता है. यह एक तरह का सिक्योर निवेश है क्योंकि न तो प्योरिटी की चिंता रहती है और न ही सिक्योरिटी का झंझट है.

2015 में शुरू हुई थी स्कीम
गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में हुई थी. इसका मकसद भौतिक रूप से सोने की मांग में कमी लाना और सोने की खरीद में घरेलू बचत का इस्तेमाल वित्तीय बचत में करना है.

 

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