दवाईयों की कमी, स्वास्थ्य विभाग कैसे संभालेगा जिम्मा

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Badaun/Atulya Loktantra : सर्दी शुरू होने के साथ ही जिला अस्पताल में कई जरूरी दवाओं का संकट अभी से गहराने लगा है। दर्द निवारक गोलियों के साथ खांसी के सीरप की कमी भी हो गई है। बताया जा रहा है कि यह समस्या जनवरी तक बनी रहेगी। दरअसल, यूपीएमएससी (उत्तर प्रदेश मेडिसिन सप्लाई कारपोरेशन) ने दवाओं की सप्लाई जनवरी से जारी करने की बात कही है। ऐसे में इस महीने स्वास्थ्य विभाग को ही व्यवस्था संभालनी पड़ेगी।

गौरतलब है कि जिला अस्पताल में इन दिनों जिन चिकित्सकों की कमी है, उनके स्थान पर नए चिकित्सक नहीं पहुंच रहे। जबकि जिन चिकित्सकों के एक ही पद हैं, उन पदों पर संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं अभी तक नवंबर तक सप्लाई देने का दावा करने वाली यूपीएमएससी ने स्पष्ट कह दिया है कि दिसंबर तक दवाओं की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग को ही करनी पड़ेगी।

दर्द की गोलियां व ट्यूब समेत खांसी के सीरप की किल्लत अभी से शुरू हो गई है। सर्दी में दर्द और खांसी व जकडऩ के मरीजों की ही भरमार रहती है। इस बारे में एडी हेल्थ डॉ. प्रमिला गौड़ का कहना है कि जो भी चिकित्सक हैं, उन्हें बेहतर काम करने को निर्देशित किया है। रही बात दवाओं की कमी की तो जनवरी से शासन स्तर से दवाएं मिलने की उम्मीद है।

जरूरत की अधिकांश दवाएं पर्याप्त हैं। जिला अस्पताल में सर्जन के नाम पर केवल एक संविदा चिकित्सक डॉ.रश्मि हैं। बाकी के दोनों सर्जन डॉ.आरएस यादव व डॉ.अवधेश का तबादला होने के बाद से दोनों पद रिक्त हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ के यहां दो पद हैं। इनमें एक डॉ.रियाज और दूसरे संविदा पर डॉ.बागीश मौजूद हैं। वहीं, तीसरे सर्जन डॉ. यूवी ङ्क्षसह का तकरीबन पांच महीने पहले फरुर्खाबाद तबादला हो चुका है लेकिन वह रिलीव नहीं हुए हैं।

नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ का एक ही पद स्वीकृत है लेकिन इस वक्त यहां डॉ. एम सिद्दीकी के अलावा डॉ. श्वेता अवस्थी और एक संविदा चिकित्सक डॉ. चक्रेश तैनात हैं। इनके अलावा, इमरजेंसी मेडिकल अफसर भी यहां महज चार बचे हैं।

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