धैर्य खत्म, राम मंदिर के लिए सरकार लाए कानून

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New Delhi/Atulya Loktantra : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा धैर्य का समय अब खत्म हुआ और अगर उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला उच्चतम न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है तो मंदिर निर्माण कार्य के लिये कानून लाना चाहिए.राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर यहां विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की ओर से आयोजित एक रैली में भागवत ने कहा कि यह ‘‘आंदोलन का निर्णायक चरण” है. उन्होंने कहा, ‘‘एक साल पहले मैंने स्वयं कहा था कि धैर्य रखें. अब मैं ही कह रहा हूं कि धैर्य से काम नहीं होगा. अब हमें लोगों को एकजुट करने की जरूरत है.

अब हमें कानून की मांग करनी चाहिए.” भागवत ने कहा, ‘‘चाहे जो भी कारण हो क्योंकि अदालत के पास समय नहीं है या राम मंदिर मामला उनकी प्राथमिकता में नहीं है अथवा संभवत: वह समाज की संवेदनशीलता को नहीं समझ पा रही है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस बारे में विचारे कि मंदिर निर्माण के लिये कैसे एक कानून लाया जाये… कानून जल्द से जल्द लाया जाना चाहिए.”उन्होंने कहा, ‘‘अब यह आंदोलन का निर्णायक चरण है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को हिंसा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें दृढ़ होना चाहिए कि सरकार इसके लिए कानून बनाए. भागवत ने यहां विश्व हिंदू परिषद की धर्म सभा में कहा, “हमें लड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन दृढ़ होने की जरूरत है. हमें ऐसा माहौल बनाना होगा कि सरकार को अब मंदिर बनाना चाहिए. हमें अब सरकार से इसके लिए कानून बनाने की मांग करनी है. हमें सरकार पर दवाब बनाने की जरूरत है.”उन्होंने कहा, “अगर एक सरकार मंदिर बनाना चाहती है और नहीं बना पा रही है तो जनता के दवाब से उसे शक्ति मिलती है. मंदिर के लिए पूरे देश को खड़े होने की जरूरत है.”उन्होंने कहा कि राम मंदिर के निर्माण का राजनीति से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा, “इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है. हमें एक भव्य राम मंदिर की जरूरत है. यह बिल्कुल वैसे बनना चाहिए जैसा हमने सोचा है। यह उन्हीं हाथों से बनना चाहिए जिन्होंने इसे 80 के दशक में बनाने का प्रयास किया था. इसके लिए हमें पूरे समाज को जुटाना होगा.”उन्होंने कहा कि समाज कानून के अनुसार नहीं बल्कि मन के अनुसार चलेगा.उन्होंने कहा, “दुनिया में हर जगह ऐसा ही है. कानून को इसे समझने की जरूरत है, वहीं समाज कानून का सम्मान करता है.”उन्होंने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राम मंदिर का निर्माण उसकी प्राथमिकता नहीं है. अदालत ने 2010 में निर्णय किया था कि भगवान राम का जन्म वहां हुआ था. यह उनका स्थान है. तब एक उम्मीद जागी थी कि राम मंदिर का निर्माण होगा. लेकिन मामला एक नई पीठ के पास चला गया जिसने इसे फिर आगे बढ़ा दिया. अदालत ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि यह उसकी प्राथमिकता नहीं है.”

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