बुरी खबर, डायबिटीज मरीजों को अब नहीं मिलेगी मर्ज की औषधि

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New Delhi/Atulya Loktantra : अगर इंसुलिन के उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि नहीं की गई तो अगले 12 साल में दुनिया के चार करोड़ टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को मर्ज की रोकथाम के लिए यह जीवनरक्षक औषधि नहीं मिल पाएगी। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लैंसेट डायबिटीज एंड इंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट आगाह करती है कि यदि लोगों ने अपनी जीवनशैली और खानपान में तेजी से बदलाव नहीं किया तो टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित इंसुलिन जरूरतमंदों की संख्या 2030 में 7.9 करोड़ हो जाएगी। इनमें से आधे को यह दवा सुलभ नहीं होगी।

भारत के लिए खतरे की घंटी
टाइप 2 पीड़ितों और इंसुलिन के जरूरतमंदों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए डायबिटीज फेडरेशन और 14 अन्य अध्ययनों से आंकड़े जुटाए गए। सभी टाइप 2 पीड़ितों को इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती है। 2018 में दुनिया भर में इसके पीड़ितों की संख्या 40.6 करोड़ थी। 2030 में 51.1 करोड़ होने का अनुमान है। इनमें से आधी से ज्यादा संख्या चीन, भारत और अमेरिका जैसे तीन देशों की होगी।

अमीरों की भी पहुंच से बाहर
धनाड्य देशों में भी लोग इंसुलिन की किल्लत महसूस करने लगे हैं। अमेरिका में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। वहां के सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने जांच की मांग की है।

बढ़ेंगे मरीज
अगले 12 साल के दौरान बढ़ती आयु, शहरीकरण और खुराक में बदलाव के साथ शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते दुनिया भर में टाइप-2 डायबिटीज के रोगी तेजी से बढ़ेंगे।

जरूरत में इजाफा
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 12 वर्षों में इंसुलिन की जरूरत 20 फीसद बढ़ जाएगी। हालांकि संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य है कि गैर संचारी रोगों के इलाज के साथ ही सबको डायबिटीज की दवाएं मिलना सुनिश्चित हो, लेकिन बढ़ती जरूरत से यह लक्ष्य पीछे छूटता दिख रहा है।

जरूरी है जागरूकता
डायबिटीज वाले व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है। हम जो खाना खाते हैं, वह पेट में जाकर ऊर्जा में बदलता है। उस ऊर्जा को हम ग्लूकोज कहते हैं। खून इस ग्लूकोज को हमारे शरीर के सारे सेल्स (कोशिकाओं) तक पहुंचाता है, परंतु ग्लूकोज को हमारे शरीर में मौजूद लाखों सेल्स के अंदर पहुंचाना होता है। यह काम इंसुलिन का है। इंसुलिन हमारे शरीर में अग्नाशय (पैन्क्रियाज) में बनता है। इंसुलिन के बगैर ग्लूकोज सेल्स में प्रवेश नहीं कर सकता।

भारत में चिंताजनक स्थिति

1980 में भारत में 1.19 करोड़ डायबिटीज के मरीज थे।

2016 में इनकी संख्या 6.91 और 2017 में 7.2 करोड़ हो गई।

1980 के मुकाबले 2014 में डायबिटीज पीड़ित महिलाओं की संख्या में 80 फीसद बढोतरी हुई है। (4.6 फीसद से 8.3 फीसद)
पिछले 17 साल में ये देश में सबसे तेजी से बढ़ती बीमारी है।

2030 तक देश में 15 करोड़ डायबिटीज मरीज होने का अंदेशा है।
देश में डायबिटीज से सालाना 51,700 महिलाओं की मौत होती है।

2030 तक देश में होने वाली मौतों का सातवां प्रमुख कारण डायबिटीज होगा।

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