आसान नहीं कोरोना से मुकाबला

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ज्ञानेन्द्र रावत

देश कोरोना नामक वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। आये-दिन पच्चीस – तीस हजार से भी ज्यादा कोरोना संक्रमितों की तादाद में बढ़ोतरी हालात की भयावहता का सबूत है। इसकी दवा भी अभी तक ईजाद नहीं हो पाई है। भले उसका परीक्षण जारी है, यह दावा किया जा रहा है। बहुत तेजी लाई गयी और परीक्षण कामयाब रहा। तब भी उसके बाजार में आने में कम से कम छह से बारह महीने का समय लग जायेगा। कोरोना संक्रमितों की तादाद यदि इसी तरह रोजाना बढ़ती रही तो एक साल में यह आंकड़ा करोड़ों को पार कर जायेगा। इसकी आशंका से ही तबाही का मंजर नजर आने लगता है।

इसलिए इस आपदा का मुकाबला हम सब उसी हालत में कर सकते हैं जबकि हम संयम के साथ बचाव के नियमों का पालन करें। यह साफ है कि नियमों का पालन न करके हम अपने जीवन से ही खिलवाड़ कर रहे हैं। जाहिर है इसका खामियाजा परिवार और हमारी संतानों को भुगतना पड़ेगा। प्रशासन, सरकार और मुख्यमंत्री -प्रधानमंत्री ने शुरूआत से ही बचाव के नियमों के पालन की देशवासियों से अपील की और बाबत अनुरोध कर रहे हैं। हमारा कर्तव्य है कि संकट की इस घड़ी में हम अब भी चेत जायें, सरकार की मुश्किल ना बढ़ायें और अपनी जिंदगी से ना खेलें। यह जान लो कि देश तबाही की ओर बढ़ रहा है।

इसलिए अब भी वक्त है, संभल जाओ, सरकार की बात मानो, लॉकडाउन समस्या का हल नहीं है। यह भलीभांति जान-समझ लो। इसलिए एक दूसरे से ना मिलो, ना हाथ मिलाओ, दिन में कम से कम बीस बार साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोओ। एक-दूसरे से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाये रखो। अगर खांसी, बुखार आदि है तो डाक्टर की सलाह लो। घर बाहर मास्क का इस्तेमाल करो। बहुत जरूरत हो तभी घर के बाहर जाओ। यह जान लो कि यह हवा से भी फैलता है।

यह मानकर चलिए कि कोरोना महामारी से जल्दी छुटकारा नहीं मिलने वाला। डब्ल्यू एच ओ और दुनिया के वैज्ञानिक भी इसका संकेत दे चुके हैं। इसलिए भाइयो-बहनो जरूरी है कि आप देश, समाज और धर्म की सेवा तभी करने में समर्थ हो सकते हैं, जबकि आप बचेंगे। आप बचेंगे तभी आपका परिवार सुरक्षित रह पायेगा। इसलिए किसी के बहकावे में ना आयें कि मुझे कुछ नहीं होगा। मेरी आप सभी से यह विनती है कि आप इस को बात सभी को बतायें कि संकट की इस घड़ी में देश, हम सब तभी बच पायेंगे, जब हम सब देशवासी एकजुट हो इस महामारी का मुकाबला करेंगे।

हमारे माननीय प्रधानमन्त्री जी भी बार बार आपसे यही अनुरोध कर रहे हैं कि हम सभी मिलकर इस महामारी को भगाने में कामयाब हो सकते हैं, पहले भी हुए हैं और इस बार भी कामयाब होंगे। दुनिया ने हमारी एकता का लोहा माना है और आप सब पूर्व की भांति इस बार भी ऐसा कर इतिहास बनाने में समर्थ होंगे। यही आपसे आशा और विश्वास है।

                                                               (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं चर्चित पर्यावरणविद हैं।)

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